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जोधपुर. हिस्ट्रीशीटर से बोलेरो जीप भेंट लेकर उसे मानद वन्य जीव प्रतिपालक बनाने की सिफारिश करने के मामले में सरकारी निर्देशों की अनदेखी की गईं। यह
खुलासा कलेक्टर की ओर से दी गई रिपोर्ट में हुआ है। सरकार ने अब तक वन विभाग को अपराधी से जीप लेने की स्वीकृति नहीं दी है। इसके बावजूद डीएफओ बीआर भादू यह जीप काम में ले रहे हैं, जिसमें सरकारी धन फूंका जा रहा है।
‘भास्कर’ ने 10 अक्टूबर को मामले का पर्दाफाश करके बताया था कि डीएफओ ने अपराधी से जीप लेकर उसे वन्य जीव प्रतिपालक बनाने की सिफारिश की थी। इसके बाद राज्य सरकार के निर्देश पर कलेक्टर ने इस मामले की जांच कराई तो तो यह साबित हो गया। कलेक्टर ने तथ्यात्मक रिपोर्ट और सभी दस्तावेज राज्य सरकार को भेज दिए हैं।
हिस्ट्रीशीटर का रिकॉर्ड भी भेजा : कलेक्टर ने मथानिया थाने के हिस्ट्रीशीटर रामपाल भवाद का रिकॉर्ड भी सरकार को भेजा है। रिपोर्ट में ग्रामीण पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट भी शामिल है, जिसमें साफ लिखा है कि भवाद हिस्ट्रीशीटर है और चोरी के एक मामले में उसे सजा भी हो चुकी है। उसके खिलाफ हत्या के प्रयास और अवैध हथियार रखने के मामले में भी चालान पेश किया जा चुका है। जो न्यायालय में विचाराधीन है।
सीसीएफ की भूमिका भी संदिग्ध
अपराधी व अफसर के इस गठजोड़ में सीसीएफ राजन माथुर की भूमिका भी संदिग्ध बनी हुई है। सिवाना में वन विभाग की जमीन पर माइंस की एनओसी देने के बहुचर्चित प्रकरण में भी माथुर ने डीएफओ भादू की मदद की थी। हिस्ट्रीशीटर से जीप लेते वक्त भी माथुर डीएफओ भादू के साथ खड़े थे। हैरत की बात तो यह है कि माथुर यह जानते थे कि सरकार ने बोलेरो लेने की मंजूरी नहीं दी है, क्योंकि स्वीकृति लेने का पत्र तो डीएफओ ने उन्हें वाहन लेने के दूसरे दिन दिया था। सबकुछ जानते हुए भी माथुर ने डीएफओ को बोलेरो चलाने और उसमें सरकारी धन फूंकने की अनुमति दी।
* जीप (बोलेरो) की स्वीकृति राज्य सरकार से नहीं मिली है। यह भी सही है कि स्वीकृति लेने का पत्र भी डीएफओ ने वाहन लेने के दूसरे दिया था। यह मामला राज्य सरकार के पास विचाराधीन है। यदि मंजूरी नहीं मिली तो वाहन लौटाया जाएगा और उसमें खर्च सरकारी धन भी डीएफओ से वसूल किया जाएगा।
—राजन माथुर, सीसीएफ, जोधपुर
क्या है रिपोर्ट में
* डीएफओ भादू ने विश्नोई टाइगर्स वन्य एवं पर्यावरण संस्था से 29 अगस्त को बोलेरो जीप भेंट में ली थी। वन विभाग के लिए जीप लेने से पूर्व सरकार की इजाजत लेना जरूरी है, लेकिन अब तक सरकार ने इसकी मंजूरी नहीं दी है।
* हिस्ट्रीशीटर से बोलेरो लेकर उसे वन्य जीव प्रतिपालक नियुक्त कराने की सिफारिश की गई। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक ने इस वर्ष 26 मार्च को एक पत्र भेजा था, जिसमें दो लोगों के नाम मानद वन्य जीव प्रतिपालक के लिए प्रस्तावित करने के निर्देश दिए थे।
* डीएफओ ने हिस्ट्रीशीटर रामपाल भवाद की नियुक्ति की सिफारिश करते वक्त तथ्यों को छुपाते हुए प्रशासन को गुमराह किया।
* सरकार की अनुमति के बिना ही डीएफओ इस बोलेरो का उपयोग कर रहे हैं, जिसमें सरकारी डीजल फूंका जा रहा है। इसकी मरम्मत के लिए भी सरकारी धन का उपयोग हो रहा है।
* डीएफओ ने 30 अगस्त को ही मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीव) से बोलेरो की स्वीकृति और वाहन के लिए डीजल एवं संधारण के लिए बजट आवंटित करने का आग्रह किया। मगर यह मंजूरी भी अब तक नहीं मिली है।