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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश में आईआईटी,आईआईएम जैसे संस्थानों की स्थापना को राजनीति से दूर रखने के लिए मैकेनिज्म बनाने का निर्देश
दिया है, लेकिन राजस्थान के कोटा में आईआईटी पर अर्जुन सिंह ने राजनीतिक कारणों से ही ब्रेक लगा दिया है। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक कोटा में आईआईटी खोलने के राज्य सरकार के प्रस्ताव पर मानवसंसाधन मंत्रालय की ओर से बनाई गई समिति ने अपनी मुहर लगा दी है।
सकारात्मक राय के साथ रिपोर्ट मानवसंसाधन मंत्री अर्जुन सिंह को सौंप दी गई है, लेकिन कांग्रेसियों के दबाव के चलते इस पर अमल रोक दिया गया है। जबकि राज्य सरकारों के प्रस्ताव के आधार पर ही समिति की अनुशंसा मिलने के बाद आंध्र प्रदेश में मेडक और बिहार में पटना से तीस किलोमीटर दूर बिहटा में आईआईटी बनाने के प्रस्ताव को मंत्रालय ने अपनी हरी झण्डी दे दी है।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान, आंध्रपदेश और बिहार में आईआईटी खोलने की घोषणा सीएनआर राव कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर गत वर्ष केन्द्र सरकार ने की थी। योजना आयोग ने तीनों आईआईटी पर अनुमानित व्यय को मंजूरी देते हुए इनकी स्थापना की राह प्रशस्त कर दी थी।
आयोग की मंजूरी के बाद राज्यों से स्थान के संबंध में प्रस्ताव मंगाया गया था। मानवसंसाधन मंत्रालय के उच्च पदस्थ अधिकारी के मुताबिक अमूमन राज्य सरकारों के प्रस्ताव पर केन्द्र की मंजूरी मिल जाती है, लेकिन कोटा के मसले पर मानवसंसाधन मंत्री पर गहरा दबाव है। राजस्थान कांग्रेस के लोग इस बात पर अड़े हैं कि किसी भी सूरत में मुख्यमंत्री के प्रस्ताव को स्वीकृति न दी जाए। उदयपुर और जयपुर में आईआईटी बनाने के समर्थक भाजपाई भी कांग्रेसियों के साथ खड़े हैं।
पीएम के निर्देश का बहाना
प्रधानमंत्री कार्यलय ने गत 12 अक्टूबर को पत्र जारी करके कहा था कि नए संस्थानो के स्थान के संबंध में फैसला उचित तंत्र बनाने के बाद ही होना चाहिए। विशेषज्ञों ने इसका असर राजस्थान आईआईटी पर भी पड़ने की आशंका जताई थी। लेकिन मानवसंसाधन मंत्रालय और पीएमओ के बीच कई दौर की बातचीत के बाद साफ हो गया है कि पहले से घोषित संस्थानों पर इस निर्देश का असर नहीं पड़ेगा और इसकी आड़ में मंत्रालय को कोटा आईआईटी पर देरी नहीं करनी चाहिए।