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पर्यटन के बहाने बाल यौन शोषण पर सरकार चिंतित

नई दिल्ली. कभी धर्म-संस्कृति के नाम पर तो कभी पर्यटन की आड़ में बच्चों के यौन शोषण के बढ़ते मामलों से चिंतित केंद्र सरकार अब अनैतिक व्यापार (रोकथाम) कानून 1956 में संशोधन करने पर विचार कर रही है। इसके तहत ऐसे अपराधों में लिप्त होने वालों को कड़ी सजा का प्रावधान किया जाएगा।

यह जानकारी केंद्रीय महिला व बाल विकास मंत्री रेणुका चौधरी ने शुक्रवार को लोकसभा में एक लिखित जवाब में दी। उन्होंने माना कि देश के कई राज्यों में पर्यटन की आड़ में बाल यौन शोषण (चाइल्ड सेक्स टूरिज्म) तेजी से प्रचलित हो रहा है।

यहां स्थिति चिंताजनक : राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग के अध्ययनों के अनुसार पर्यटन की आड़ में बाल यौन शोषण के अधिकांश मामले महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में सामने आए हैं।

निराश्रित बच्चों के लिए भी योजना : सरकार फुटपाथ में रहने वाले निराश्रित बच्चों को यौन शोषण का शिकार होने से रोकने के लिए ‘एकीकृत योजना’ लाने जा रही है। इसके अलावा 11वीं पंचवर्षीय योजना में ‘एकीकृत बाल संरक्षण योजना’ को भी शामिल किया जाएगा। इसके तहत बच्चों के लिए परिवर्ती संरक्षण गृह बनाए जाएंगे।

वेबसाइट पर जानकारी
इसी योजना के तहत देशभर से गुमशुदा बच्चों की जानकारी वेबसाइट पर दी जाएगी। मंत्रालय अगले एक साल के भीतर बाल अपराधियों के मामलों के त्वरित निपटारे के लिए जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की संख्या में भी इजाफा करने जा रही है।





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