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नंबर मिले 100 तो फर्स्ट क्लास गरीब

बिलासपुर. शासन ने गरीबों की पहचान के लिए भी नंबर तय कर दिए हैं। जिसे जितने ज्यादा नंबर मिलेंग, वह उतना ही गरीब माना जाएगा और गरीबी रेखा सूची में उसका नाम शामिल किया जाएगा। जीरो नंबर पाने वाला गरीबों की श्रेणी में नहीं माना जाएगा।राज्य शासन के निर्देश पर शहरी गरीबों की सूची तैयार करने के लिए सर्वे कराया जा रहा है। इसके लिए प्रशासन की ओर से प्रोफार्मा तैयार किया गया है। इसमें परिवार के डिटेल के तहत मुखिया, परिवार की सदस्य संख्या, व्यवसाय, वार्षिक आय, परिवार के हरेक व्यक्ति की प्रतिमाह इनकम का ब्योरा देना जरूरी है। इसके साथ ही उसके रहन-सहन की जानकारी भी देनी होगी।

साथ ही व्यक्ति के जीवन स्तर का पता लगाने के लिए भी कुछ कालम निर्धारित किए गए हैं। इसमें व्यक्ति को जो जानकारी देनी होगी, उसमें घर की छत और फर्श का कच्च या पक्का होना, पानी आपूर्ति की व्यवस्था, घर में प्रसाधन सहित अन्य सुविधाओं की स्थिति, शैक्षणिक स्तर, रोजगार का प्रकार, घर के बच्चे स्कूल जाते हैं या काम करते हैं या फिर दोनों ही श्रेणी में नहीं आते आदि शामिल है। इसके साथ ही घर खुद का, पट्टे या किराए का होने के संबंध में भी जानकारी ली जाएगी। इसमें किराए की राशि का उल्लेख भी करना होगा।

शासन द्वारा निर्धारित फार्म में कुल 14 बिंदुओं में जानकारी दी जानी है। इसी आधार पर उस व्यक्ति और उसके परिवार की श्रेणी निर्धारित की गई है। मांगी गई जानकारी में जो नंबर निर्धारित किए गए हैं, उसके अनुसार जो जितनी ज्यादा अव्यवस्था और असुविधाजनक स्थिति में है, उसे उतने ही ज्यादा नंबर दिए जाएंगे। इसके लिए प्राथमिकता श्रेणी भी तय कर दी गई है।

फार्म में दी गई जानकारी के आधार पर कुल छह श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। 80 से 100 नंबर पाने वाले को प्रथम श्रेणी में रखा गया है, 60 से 80 के बीच अंक पाने पर द्वितीय श्रेणी, 40 से 60 नंबर पर तीसरे स्थान पर, 20 से 40 नंबर पर चौथा स्थान और 0 से 20 नंबर पाने पर पांचवां स्थान निर्धारित किया गया है। इसके बाद छठवें नंबर पर व्यक्ति अपात्र यानी धनी की श्रेणी में आ जाएगा।

साल भर में 12 हजार कमाने वाला ही गरीब :
बढ़ती महंगाई में जबकि व्यक्ति हर महीने 7-8 हजार कमाने के बाद भी मुश्किल से अपना परिवार चला पाता है, केंद्र शासन ने गरीबी रेखा का जो क्राइटेरिया निर्धारित किया है, उसके अनुसार पूरे परिवार की इनकम 12 हजार के आसपास होने पर ही उसे गरीब माना जाएगा, अन्यथा नहीं। प्रति व्यक्ति 508 रुपए 26 पैसे कमाने के आधार पर अगर पति-पत्नी मिलकर महीने में एक हजार 16 रुपए 52 पैसे से ज्यादा कमा लेते हैं, तो वे गरीब नहीं हैं। इसी परिभाषा के आधार पर सूची तैयार की जाएगी। इसी तरह जिनके पक्के मकान हैं, उन्हें गरीब नहीं माना जाएगा।





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