नई दिल्ली. केन्द्रीय वित्त मंत्री पी चिदम्बरम ने इस वित्त वर्ष में देश की आर्थिक विकास दर नौ प्रतिशत के करीब रहने की संभावना व्यक्त करते हुए कहा है कि
निर्यात वृद्धि कुछ धीमी पड़ सकती है। श्री चिदम्बरम ने एक व्यापारिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के अलावा जिन्सों और खाद्य सामग्री के ऊंचे दामों से खतरा बना हुआ है।
वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षो में आर्थिक विकास दर औसतन 8.6 प्रतिशत रही है। उन्हें पूरा यकीन है कि 2007-08 में भी यह इसके आसपास रहेगी यानी यह नौ प्रतिशत के करीब रहेगी। लेकिन उन्होंने कहा कि देश को बुनियादी ढांचे के निर्माण में तेजी लानी होगी। उसे उच्च आर्थिक विकास दर बनाए रखने के लिए अगले पांच वर्षो में लगभग 20 हजार करोड़ रुपए निवेश करने होंगे। वित्त मंत्री का कहना था कि लगभग पांच हजार करोड़ रुपए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के रूप में आने चाहिए।
देश में बड़ी तेजी से हो रहे पूंजी प्रवाह के बारे में श्री चिदम्बरम ने कहा मुझे भरोसा है कि हम इस पर मास्टरी हासिल कर लेंगे। विदेशी इस साल भारत के शेयर बाजारों में करीब 1700 करोड़ डालर यानी लगभग 70 हजार करोड़ रुपए लगा चुके हैं। इससे रुपए को मजबूती मिलते जा रही है और रिजर्व बैंक के लिए अतिरिक्त नगदी का प्रबंधन करने में दिक्कत हो रही है। वित्त मंत्री ने कीमतों में स्थिरता बनाए रखने में कामयाबी मिलने का भी भरोसा जाहिर किया।
रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर राकेश मोहन ने भी कल कहा था कि केन्द्रीय बैंक कीमतों में स्थिरता रखने तथा नगदी के प्रबंधन के लिए सभी उपाय करेगा। इन उपायों में बाजार में हस्तक्षेप के लिए बांड, तरलता सामंजस्य सुविधा और नगद सुरक्षित अनुपात शामिल है। श्री चिदम्बरम ने कहा कि भारत की निर्यात वृद्धि कुछ धीमी पड़ सकती है। गौरतलब है कि रुपए की मजबूती के कारण हाल के महीनों में निर्यात वृद्धि धीमी पड़ी है।
वित्त मंत्री का कहना है कि अमरीका के जोखिम वाले आवास ऋण, सबप्राइम, संकट और वहां की अर्थव्यवस्था में मंदी के कारण इसमें और गिरावट आ सकती है। भारत के निर्यात में करीब 40 प्रतिशत हिस्सा अमरीका का होता है।
वित्त मंत्नी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डालर प्रति बैरल के आसपास पहुंच जाने से मुद्रास्फीति को लेकर दुनियाभर में ¨चता व्याप्त है। इसके और बढ़ने का अंदेशा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि नीतियों में इस तरह तालमेल किया जाना जरुरी है कि देश में मुद्रास्फीति बढ़ नहीं सके।