नई दिल्ली. उपहार अग्निकांड में कोर्ट ने सिनेमाहॉल के मालिक अंसल बंधुओं को दो साल की सजा सुनाने के साथ ही उन्हें 25 हजार रुपए की राशि पर जमानत
भी दे दी। कोर्ट ने उपहार सिनेमाहॉल के चार और दिल्ली विद्युत बोर्ड (डीवीबी) के तीन कर्मचारियों को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने उपहार सिनेमाहॉल को चालू रखने की अनुमति देने वाले तत्कालीन डीसीपी (लाइसेंसिंग) आमोद कंठ व अन्य लोकसेवकों की भूमिका की सीबीआई जांच के आदेश भी दिए।
सभी आरोपियों को सजा : दस साल पहले ‘बॉर्डर’ फिल्म के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के उपहार सिनेमाहॉल में दुर्घटनावश लगी आग में 59 लोगों की जान चली गई थी। शुक्रवार को एडीशनल सेशंस जज ममता सहगल ने सभी 12 दोषियों को सजा सुनाई। इन सभी पर पांच-पांच हजार रुपए का जुर्माना भी ठोका गया है।
इस मामले में एमसीडी के दो तथा दिल्ली अग्निशमन विभाग के एक अधिकारी को भी दो साल जेल की सजा सुनाई गई है। इन्हें भी 6-6 हजार रुपए के मुचलके पर जमानत दे दी गई।
लापरवाही के जिम्मेवार
उद्योगपति व बिल्डर सुशील व गोपाल अंसल को उपहार अग्निकांड में लापरवाही के कारण मौत का जिम्मेवार माना गया है। इससे पहले सभी दोषियों ने खुद को प्रोबेशन पर छोड़े जाने की गुहार लगाई थी। विधि व उद्योग जगत से जुड़े लोगों का पहले ही यह कहना था कि अंसल बंधुओं को जेल की सजा देने की बजाय उन पर मोटी रकम का जुर्माना ठोका जाना चाहिए, ताकि अन्य उद्योगपतियों को लापरवाही न बरतने का सबक मिल सके। उन पर लगे आरोप इतने मामूली हैं कि जेल होने पर भी उन्हें आसानी से जमानत मिल जाएगी।
बुधवार को सुनवाई के दौरान दोषियों ने एक सुर में कहा था कि उन्हें या तो छोड़ दिया जाए, या फिर उनसे जुर्माना वसूल लिया जाए, क्योंकि जिस प्रावधान के तहत वे दोषी ठहराए गए हैं, उसमें जेल भेजा जाना जरूरी नहीं है।