अजमेर. उत्तर-प्रदेश में सिलसिलेवार विस्फोट के पीछे उन्हीं दहशतगर्र्दो का हाथ होने की आशंका है, जिन्होंने अजमेर में बम धमाके की वारदात अंजाम दी थी। दोनों
वारदात के तरीके और तकनीक में कुछ समानताएं पाई र्गई हैं। सुरक्षा एजेंसियां देश के विभिन्न हिस्सों में पिछले दिनों हुए विस्फोट के बाद जुटाए गए तथ्यों की समीक्षा कर कड़ी से कड़ी जोड़ने में जुटी हैं। इस बीच, अजमेर में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है।
गरीबनवाज की दरगाह और उत्तरप्रदेश के सिलसिलेवार धमाकों में अपनाई गई तकनीक काफी हद तक एक जैसी है। दरगाह में विस्फोट के मामले की जांच कर रहे स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने हरकत-उल-जिहाद-ए-इस्लामी (हूजी) को शक के दायरे में लिया है। हूजी देवबंदी विचारधारा का संगठन है और उत्तरप्रदेश में देवबंदी विचारधारा की तगड़ी पकड़ है।
जांच की दिशाएं
हैदराबाद के विस्फोट में पाक समर्थित बांग्लादेशी आतंकी संगठन हूजी शक के घेरे में है। मालूम हो कि पाकिस्तान के दो धार्मिक संगठनों ने 1980 में हूजी की बुनियाद खड़ी की थी। पुलिस ने देवबंदियों को भी शक के दायरे में रखा। अजमेर में देवबंदियों की मस्जिदें तलाशी र्गई। ऐसे मौलवियों पर नजर रखी गई, जो देवबंदी थे। पुलिस ने हाल ही में बॉम्बे मर्क्ेटाइल बैंक के एक पूर्व मैनेजर और मौजूदा चपरासी को भी शक के घेरे में लिया है। पुलिस का मानना है कि पूर्व मैनेजर हवाला कारोबार से जुड़ा है। इससे पूर्व सीकर के खंडेला से मौलवी शमीम, झारखंड से खुशीबुर्रहमान, उस्मानाबाद से इमरान पठान को हिरासत में लिया गया था।
* विस्तृत विवरण का इंतजार है। हैदराबाद की मक्का मस्जिद और दरगाह धमाके की साजिश में समानता तो पूरी तरह पुख्ता हो चुकी है, लेकिन उत्तरप्रदेश के धमाकों से समानता के बारे में पूरी जानकारी मिलने के बाद ही कहा जा सकेगा।
- एके जैन, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक
तार जुड़ने के आसार..
* उत्तर प्रदेश में सिलसिलेवार धमाके किए गए। अजमेर में भी ऐसी ही कोशिश की गई थी, लेकिन संभवत: तकनीकी कारण से दूसरा बम फट नहीं पाया।
* दोनों ही जगह बम विस्फोट की साजिश अंजाम देने के लिए टिफिन का इस्तेमाल किया गया।
* उत्तर प्रदेश में बम धमाके मोबाइल फोन के जरिए किए गए थे, इसी तरह अजमेर में फटा बम भी मोबाइल से जुड़ा था।
* दरगाह बम कांड में एसओजी ने देबबंदी विचारधारा के संगठन हूजी को संदिग्ध माना है। उत्तर प्रदेश में इस विचारधारा का काफी असर बताया जाता है।