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राज्य सरकार से जवाब तलब

अजमेर. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पुलिस हिरासत में यातना के राज्य से जुड़े चार मामलों में सरकार को दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए हैं। आयोग ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब भी किया है। इनमें अजमेर के गंज थाने का भी एक मामला शामिल है, जिसमें पुलिसकर्मियों ने पीड़ित से रकम हड़पने के लिए न सिर्फ मारपीट की, बल्कि झूठा मुकदमा भी दर्ज कर लिया।

अजमेर के एक अन्य प्रकरण में, पुलिस हिरासत में हुई मारपीट के बाद जेल में हुई मौत पर राष्ट्रीय आयोग ने राज्य मानवाधिकार आयोग को कार्रवाई के लिए भेज दिया है। जिला मानवाधिकार समिति के जरिए जांच के बाद दोनों मामलों की शिकायत पीपुल्स वाच नामक संस्था ने आयोग को की थी। जानकारी के मुताबिक, पहला मामला इंदिरा कॉलोनी वैशाली नगर निवासी सतीशकुमार पुत्र फकीरचंद का है। सतीश तीन जुलाई को टेम्पो का लोन चुकाने के लिए डेढ़ लाख रुपए लेकर जा रहा था। आरोप है कि गंज थाने के एएसआई शमशेर मोहम्मद और सिपाही त्रिलोक ने उसे रोका और थाने ले गए। दोनों ने मारपीट की और झूठा मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भिजवा दिया। सतीश का कहना है कि पुलिस की मारपीट के कारण वह आज तक बीमार है।

राष्ट्रीय आयोग ने अजमेर जेल में कैदी की मौत के दूसरे मामले में सुनवाई के बाद प्रकरण राज्य मानवाधिकार आयोग को कार्रवाई के लिए सौंप दिया। प्रकरण के अनुसार पीसांगन पुलिस के दो जवान पिछले साल 23 जुलाई को बिना वर्दी गनाहेड़ा निवासी राजेन्द्र रावत के घर पहुंचे। पुलिसकर्मी गांजा बेचने का आरोप लगाते हुए राजेन्द्र को मोटरसाइकिल पर बैठा कर थाने ले गए।

आरोप है कि राजेन्द्र को झूठे मामले में फंसा कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भिजवा दिया गया। जेल में 25 जुलाई को राजेन्द्र की मौत हो गई। परिवारजन के मुताबिक पुलिस जब राजेन्द्र को ले गई थी, तब वह स्वस्थ्य था। घरवालों ने राजेन्द्र के साथ पुलिस हिरासत में मारपीट की आशंका जताई है, जो जानलेवा साबित हुई।

पीपुल्स वाच संस्था की राज्य निर्देशिका केरोल गीता ने बताया कि दोनों मामलों में संस्था ने जिला मानवाधिकार निगरानी समिति से जांच कराने के बाद आयोग को शिकायतें पेश की थीं। दूसरी ओर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जोधपुर के उदय मंदिर थाना क्षेत्र के सलीम और मंडोर इलाके के भूराराम के मामलों में राज्य सरकार से जवाब तलब किए गए हैं। पीपाड़ थाने क्षेत्र की इमली बाई के मामले में भी अफसरों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।





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