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निजी बसों का संचालन अब कालवी प्याऊ से

जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बालिया व न्यायाधीश भंवरू खां की खंडपीठ ने रसाला रोड ओवरब्रिज के नीचे निजी बस स्टैंड निजी बससंचालित करने के प्रशासनिक प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कल्याणसिंह कालवी प्याऊ से बसें संचालित करने का आदेश दिया है।

खंडपीठ ने मोहल्ला विकास समिति की जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि रसाला रोड ब्रिज का निर्माण यातायात दबाव को कम करने के लिए किया गया था। यदि वहां पर निजी बस स्टैंड स्थानांतरित कर दिया गया तो ब्रिज बनाने का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। कोर्ट ने ब्रिज के नीचे निजी बसों के ठहराव के सुझाव को भी अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने प्रशासन से कहा कि बस स्टैंड की दूरी के मद्देनजर वहां सिटी बस और यातायात के अन्य साधन उपलब्ध कराए जाएं।

क्या था मामला
मोहल्ला विकास समिति ने जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में बनी कमेटी के कालटेक्स बस स्टैंड को रसाला रोड ब्रिज के नीचे स्थानांतरित करने के निर्णय को चुनौती दी थी। समिति ने अपनी याचिका में कहा कि यहां से 9 सड़कें निकलती हैं और यह चौराहा शहर में आने का मुख्य मार्ग है। इस चौराहे पर फिलहाल सरकारी बस स्टैंड, हाईकोर्ट, कलेक्ट्रेट, सब्जी मंडी, होटल और कई शिक्षण संस्थाएं हैं। इससे यहां यातायात दबाव काफी अधिक रहता है। यदि इस व्यस्ततम चौराहे के समीप निजी बस स्टैंड को शिफ्ट किया गया तो इससे असुविधाएं बढ़ जाएंगी। इस पर 13 मार्च 07 को हाईकोर्ट ने निजी बस स्टैंड को यहां शिफ्ट नहीं करने के अंतरिम निर्देश दिए। हाईकोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए डिप्टी रजिस्ट्रार (न्यायिक) को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर रिपोर्ट देने को कहा। रिपोर्ट में इसे तात्कालिक विकल्प माना और भविष्य में निजी बस स्टैंड को अन्यत्र स्थानांतरित करने का भी सुझाव दिया गया।

क्या थी योजना
पुराने स्टेडियम स्थित निजी बस स्टैंड को जनवरी 2007 में रसाला रोड ब्रिज के नीचे शिफ्ट करने का फैसला हुआ। यूआईटी ने बस स्टैंड के लिए प्लेटफार्म बनाने और पावटा ए रोड की सड़क को चौड़ा करने के काम पर करीब 53 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान लगाया। नाला कवर करने के कार्य पर 17.31 और डब्ल्यूबीएम व डामरीकरण के कार्य पर 10.76 लाख खर्च करने की तैयारी शुरू की गई।

यह था प्रस्ताव
- रसाला ओवरब्रिज के नीचे एकसाथ 25 बसें खड़ी की जाएंगी।
- कालटेक्स बस स्टैंड पर 70-80 बसें खड़ी रहती थीं। तय किया गया कि शेष बसें कल्याणसिंह कालवी प्याऊ और बीजेएस रेलवे फाटक के समीप खड़ी रहेंगी।
- बाद में हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी, लेकिन निजी बस ऑपरेटरों के अड़ियल रवैये के कारण प्रशासन ने एक पखवाड़े पहले ब्रिज के समीप बसों को खड़े रहने की इजाजत दी थी।
- अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद बसों का संचालन एक बार फिर कल्याणसिंह कालवी प्याऊ से संभव हो पाएगा।





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