जालंधर.परमात्मा की बाणी आत्मा में ऐसा रस घोलती है कि भूले-भटके, चोट खाए और दुनिया से बेमुख भी खींचे चले आते हैं। यहां जन-जन को मंजिलें मिलती हैं और होती है मोक्ष की प्राप्ति। गुरबाणी के वाक करते हैं मार्ग दर्शन।
गुरुपर्व के पावन अवसर पर रिपोर्टर सुरिंदर कौर ने तलाश किए ऐसे लोग जिनकी नीरस जिंदगी को गुरु की बाणी ने बदल कर रख दिया और करवाया सही गलत का ज्ञान..
जिंदगी के कीमती पांच साल मैंने नशा करते और पाखंडी साधुओं के डेरों में गुजार दिए। मगर गुरबाणी की तुक‘गुर साखी मन जागी तां चंचल मत त्यागी, गुर साखी का उजयारा मिटिया सगल अंधारा’ ने मेरी जिंदगी ही बदल दी। इस वाक तुकबंदी ने मेरे अंदर निष्काम सेवा करने का जज्बा पैदा किया। आज गुरबाणी से जुड़े हुए लोगों की सेवा करना चाहता हूं।
- चरनजीत सिंह, स्टूडैंट व राइटर
‘चरण-शरण गुरु एक पेंडा जाय, चल सतगुरु कोट पेंडा आगे होए लेत है’। मैंने अपनी जिंदगी के 22 साल गुरुद्वारे की सेवा में गुजारे हैं। मेरी बेमुख जिंदगी में किसी ने मुझे अपने 22 साल गुरुद्वारा की सेवा में देने को कहा। तब से सर्दी-गर्मी, आंधी-तूफान किसी भी मौसम की परवाह किए बगैर मैंने अपना वचन पूरा किया। यह शक्ति मुझे परमात्मा की मेहर से ही मिल रही है।
- विनोद जोशी, गुरु घर की सेवक
पहले मैं शराब बहुत पीता था। परिवार के लिए मेरा होना और न होना एक समान था। मेरी हर सोच नसे से बंधी थी। बस फिर एकदिन गुरुद्वारा साहिब चला आया, वहीं कीर्तन सुनते हुए एक वाक‘करे करावे आपे आप, मानुस के किछ ना ही हाथ।’ ने मेरी जिंदगी बदल दी। उसी दिन से मैंने शराब छोड़ने की कसम खा ली। तब से परमात्मा के दर की सेवा कर रहा हूं और जिंदगी यूं ही बसर करना चाहता हूं। - प्रितपाल सिंह,
मेरे घर तीसरी संतान का जन्म होने वाला था। मेरा परिवार इस संतान को धरती पर लाना नहीं चाहता था। कुछ नहीं सूझ रहा था। परमात्मा के दर पर जाते ही मैंने वाक सुना ‘तुम दाते ठाकुर प्रितपालक नायक खसम हमारे, निमख निमख तुम ही प्रितपालहो हम बारिक तुमरे धारे।’ बस इस वाक के कानों में पड़ते ही मैंने सब कुछ छोड़ दिया। सोचा जो वह करेगा आप करेगा। सब कुछ ठीक हो गया और आज मेरी वही संतान सबसे ज्यादा होनहार है। आज 28 सालो से मैं वाहेगुरु की सेवा कर शांति महसूस कर रहा हूं।
- ज्ञानी बलबीर सिंह
रोशन गुरुद्वारे
गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, गुरु नानक मिशन चौक
गुरुद्वारा प्रधान बलबीर सिंह सैनी ने बताया कि इसी गुरुद्वारा में पहले एक छोटा गुरुद्वारा साहिब था, जिसका नींव पत्थर 1971 में तत्कालीन जालंधर डिवीजन कमिशनर ने रखा था। इसके साथ ही एक डिस्पैंसरी थी।सन्1972 में पूर्व यूनियन मिनिस्टर स्वर्ण सिंह ने हॉस्पिटल बिल्डिंग का नींव पत्थर रखा। 2006 के गुरुपर्व पर गुरुद्वारा साहिब को नया रूप दिया गया।
गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, मॉडल टाऊन
इस गुरुद्वारा साहिब का नींव पत्थर वर्ष 1954 में रखा गया। इसकी स्थापना पांच प्यारों ने की। गुरुद्वारा साहिब के जनरल सैक्रेटरी सुरिंदरपाल सिंह ग्वालियर ने बताया कि गुरुद्वारा साहिब मैनेजमेंट की तरफ से 1986 से गुरु अमरदास पब्लिक स्कूल चलाया जा रहा है।
गुरुद्वारा सिंह सभा, नीला महल
पाकिस्तान बनने के समय से नीला महल मोहल्ले में यह गुरुद्वारा स्थापित है। इस गुरुद्वारे को गुरु रामदास सेवा सोसाइटी चला रही है। चेयरमैन बलजीत सिंह नीलामहल ने बताया कि हर साल गुरुद्वारे में 13 जनवरी से गुरु गोबिंद सिंह को समर्पित अखंडपाठ रखे जाते हैं।
गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, अर्बन अस्टेट फेस :1
गुरुद्वारा सोसायटी के प्रधान कर्नल तेजा सिंह व सैक्रेटरी महिंदर सिंह ने बताया कि गुरुद्वारा की तरफ से एक एलोपैथी व चैरीटेबल डैंटल डिस्पैंसरी चलाई जा रही है।
गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, जालंधर कैंट
सन् 1948 में इस गुरुद्वारे की स्थापना हुई। प्रधान प्रीतम सिंह चड्डा ने बताया कि गुरुद्वारे की तरफ से 10वीं तक गुरु नानक कन्या विद्यालय भी चलाया जा रहा है।