bhaskar Web English
HomeNewsHaryanaPanipat Panipat

अमेरिकी हालीस्टिन गाय की आजमाइश

करनाल. वर्ष 1990 के करीब सरकार ने लगा दिया था आयात पर प्रतिबंध। 17 साल बाद फिर से अमेरिका व कनाडा से लाया जाएगा हालीस्टिन सांड का वीर्य, करनाल के एनडीआरआई में क्रास ब्रीड से तैयार किए जाएंगे बछड़े व बछड़ी।

भारत में एक बार फिर से हालीस्टिन सांड का वीर्य अमेरिका से लाने की तैयारी चल रही है, ताकि गाय का पालन-पोषण दोबारा से कराया जा सके।सरकार की ओर से नोटिफिकेशन हो चुका है व मार्च 2008 तक हालीस्टिन का वीर्य इंडिया आने लगेगा, जिसके बाद यहां इस किस्म की गाय व सांड तैयार किए जाएंगे, जिससे दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में भरपूर मदद मिल सकेगी। करीब 1990 में इस किस्म के वीर्य को अमेरिका से लाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। अब फिर से भारतीय वैज्ञानिक इसे इंडिया लाने जा रहे हैं, क्योंकि वीर्य जांच करने वाली विश्व स्तर की कंपनी ओआईई ने यह साफ कर दिया है कि अब हालीस्टिन में किसी तरह की बीमारी नहीं है, इसे विश्व स्तर पर कहीं भी पाला जा सकता है।

क्यों हुई थी बैन :

हालीस्टिन का सीमन इंडिया लाने पर बैन करने का सबसे प्रमुख कारण मैड काऊ डिजीज का पनपना रहा था। इस बीमारी से गाय मरने लगी थी, जिस कारण इंडिया में इसे बैन कर दिया गया था।

साहीवाल से अधिक दूध, लेकिन फैट कम : इंडिया में 20 फीसदी के करीब साहीवाल गाय को पाला जाता है, जो कि एक ब्यांत में 1800 लीटर तक औसतन दूध देती है, जबकि चार हजार लीटर तक के रिकार्ड भी बने हैं, लेकिन हालीस्टिन गाय 7000 लीटर तक दूध एक बयांत में देती है, पर इसके दूध में साहीवाल के मुकाबले फैट कम होती है।

क्रास ब्रीड तैयार होगी: रैना :

एनडीआरआई करनाल के कृत्रिम गर्भाधान केंद्र के इंचार्ज वी एस रैना का कहना है कि जब मार्च माह के बाद कनेडा व अमेरिका से वीर्य आएगा तो इससे क्रास ब्रीड तैयार होगा, जिसके बाद हालीस्टिन तैयार की जाएगी।

इंडिया में अभी भी हैं हालीस्टिन गाय :

ऐसा नहीं है कि अमेरिका व कनाडा में ही हालीस्टिन गाय अधिक संख्या में मिलती हैं, इंडिया के बैंगलोर व अन्य इलाकों में यह गाय पाई जाती है, लेकिन जिस औसत के साथ यह अमेरिका व कनाडा में दूध देती है, इस औसत से दूध यहां नहीं दे पा रही है, जिस कारण नस्ल पर इंडिया में शोध करने की जरुरत है।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: