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वास्तुकार्य में कूर्म की प्रतिष्ठा जरूरी

वास्तु विज्ञान. घर को पारिवारिक सुख, शांति, समृद्धि और स्वास्थ्य का भी आश्रय स्थल माना गया है। यह तभी संभव है जबकि उसकी नींव रखने के साथ ही वास्तुकार्य में कूर्म की प्रतिष्ठा जरूरीइन बातों पर विचार किया जाए। वास्तु की मान्यता है कि वस्तु से ही वास्तु संभव है। पृथ्वी प्रथम वस्तु है, सारे वास्तु उसी से होते हैं। पृथ्वी को कूर्माश्रित या कूर्मपृष्ठा भी कहा गया है। इसलिए शास्त्रों का निर्देश है कि जब भी वास्तु का निर्माण हो, वहां धातु रूप में कूर्माकृति (कछुए की आकृति) का निवेश किया जाना चाहिए। चीन के वास्तुमत में भी कूर्मस्वरूप के निवेश को महत्व दिया गया है।

वास्तुग्रंथ मयमतं में नींव निवेश या शिलान्यास के अवसर पर फेला या मंजूषा बनवाकर वहां धातु, रत्नादि निवेशित करने या गाड़ने का निर्देश है। इसके विपरीत नागर वास्तु ग्रंथों अपराजित पृच्छा, राजवल्लभ में कूर्म की स्थापना का ही निर्देश है।

कूर्म के रूप में ही भारत के नक्शे की कल्पना की गई है। मरकडेय पुराण, गर्गसंहिता, रुद्रयामल, बृहतसंहिता, लुप्तप्राय: समास संहिता, मुहूर्ततत्व आदि में भारत को कूर्म के रूप में ही वर्णित किया गया है। भागवत आदि पुराणों में शिशुमारचक्र के रूप में भी भारत की कल्पना की गई है, किंतु हरि को कूर्मरूप में ही यहां विद्यमान कहा गया है। शिशुमार जलीय सूंसा जीव है। इस प्रकार देश के लघु स्वरूप को ही अपने भवन में स्थापित करने का निर्देश है ताकि हर परिवार एक देशीय नक्शे पर अपनी स्थिति बनाए, किंतु वास्तुपुरुष को गाड़ने का जिक्र कहीं नहीं है। वास्तुपुरुष वस्तुत: सूर्य की संक्रांति के अनुसार गृह के मुख की दिशा निर्धारण के संदर्भ में देखा जाता है। ऐसे में शास्त्रीय निर्देशों का पालन निश्चित ही लाभकारी है। जिन घरों में कूर्मचक्र नहीं है, वहां नींव के बराबर गड्ढा खोदकर उसका निवेश करना हितकारी है।

अपराजित पृच्छा में स्पष्ट किया गया है कि कूर्म की पीठ पर ही भूमि की अवस्थिति है, हालांकि यह बात विज्ञान सम्मत नहीं है किंतु देश का रूप जरूर वैसा ही है। मनुष्यालय चंद्रिका और शिल्परत्नं में वास्तु का कोई दोष रह जाने पर जिन पांच मुख वाले चांदी के पात्र को वहां गड़वाने का उल्लेख है, उसमें एक मुख कूर्म का ही बताया गया है। यह वास्तु के वेध, दूषण का शीघ्र निवारण करता है।
(लेखक ने मयमतं, अपराजित पृच्छा, राजवल्लभ आदि का संपादन किया है)





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