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Chhattisgarh
Raipur Raipur अंबिकापुर. डकैती व लूट के मामले में सेंट्रल जेल में बंद 3 बंदी शुक्रवार की रात जेल की दोहरी सुरक्षा दीवार को फांदकर फरार हो गए। मामले की जांच जिला प्रशासन ने शुरू कर दी है।
घटना का पता शनिवार की सुबह उस समय चला, जब बैरक नंबर-7 के संतरी लालधर भगत ने बंदियों की गिनती की। बैरक से लूट के आरोपी विनोद प्रजापति, मो. शमीम उर्फ अहमद व डकैती का आरोपी जमुना सिंह अनुपस्थित थे। तलाशने पर उनका पता नहीं चला, तब लालधर ने अधिकारियों को इसकी सूचना दी। थोड़ी देर में सहायक जेलर विनोद कुमार शर्मा व अन्य अधिकारी वहां पहुंचे। उन्होंने बैरक की जांच की। बैरक नंबर-7 की खिड़की का एक राड कटा हुआ था तथा जेल की पश्चिमी दीवार के पीछे जेल की ही चादर लटकी हुई मिली, जिसका रस्सी की तरह उपयोग किया गया था।
अधिकारियों ने घटना की सूचना कलेक्टर डा. रोहित यादव, प्रभारी जेल अधीक्षक श्रीमती संजय चंदन त्रिपाठी व एसपी एचके राठौर को दी। सभी अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने मामले में 224 के तहत अपराध दर्ज कर लिया है।
प्रभारी जेल अधीक्षक श्रीमती त्रिपाठी व एसपी श्री राठौर ने बताया कि बैरक नंबर- 7 की खिड़की के पास लोहा काटने वाली आरी मिली है, साथ ही खिड़की का एक राड कटा हुआ है जिसे आरी से काटा गया है। यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि बैरक से बंदी जेल की दोहरी दीवार फांदकर कैसे भागे? दीवार के पीछे लटकी हुई चादर के एक सिरे पर कुछ ईंटें बंधी हैं, पर उन ईंटों के सहारे कोई व्यक्ति चढ़कर दीवार फांद जाएगा, स्पष्ट नहीं हो पा रहा है।
श्रीमती त्रिपाठी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने वाले जेल के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जेल अधीक्षक का पद रिक्त
सेंट्रल जेल में फिलहाल जेल अधीक्षक का पद रिक्त है। जेल अधीक्षक का प्रभार डिप्टी कलेक्टर व अंबिकापुर एसडीएम श्रीमती संजय चंदन त्रिपाठी के पास है।
फरार होने वाले कौन हैं
भागने वाले बंदियों में विनोद प्रजापति गांधीनगर (अंबिकापुर) थानांतर्गत सकालो का रहने वाला है। वह 4 फरवरी 2006 से लूट के मामले में सेंट्रल जेल में बंद था। मो. शमीम उर्फ अहमद मदगुरी कुसमी निवासी है। वह भी लूट के मामले में अप्रैल 2006 से जेल में था, जबकि जमुना सिंह झारखंड के हाथसग डुमरी का रहने वाला है। वह मार्च 2007 से जेल में बंद था। ये सभी विचाराधीन बंदी थे।