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..अम्मा देख तेरा मुंडा बिगड़ा जाए

बिलासपुर. तिमाही परीक्षा में गैरहाजिर रहने वाले छात्रों को सबक सिखाने कालेज प्रशासन कड़ा रुख अपना रहे हैं। अभिभावकों से की गई लिखित शिकायत में स्पष्ट अम्मा देख तेरा मुंडा बिगड़ा जाएकिया गया है कि उनका बच्च तिमाही में अनुपस्थित रहा, लेकिन छमाही में अनुपस्थित न रहे। परीक्षा में लगातार गैरहाजरी छात्र को वार्षिक परीक्षा में शामिल किए जाने में अड़चन पैदा कर सकती है।

छात्रों में पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करने के उद्देश्य से उच्चशिक्षा विभाग ने कालेजों में भी तिमाही व छमाही परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत शहर के कालेजों में अपनी व्यवस्था व सुविधानुसार विभिन्न तिथियों में छमाही परीक्षा ली गई। साल में वार्षिक परीक्षा के अलावा भी परीक्षा होने से छात्रों में उत्साह तो है, लेकिन शत प्रतिशत छात्रों में ऐसा नहीं है। अभी भी करीब बीस प्रतिशत से भी अधिक छात्र परीक्षा में शामिल नहीं हो रहे हैं।

एसबीआर जरहाभाठा कालेज के प्राचार्य एवं उच्चशिक्षा विभाग के अतिरिक्त संचालक डा.बीएल गोयल ने बताया कि उनके कालेज में नवंबर माह में तिमाही परीक्षा ली गई। प्रवेश एवं छात्रसंघ की प्रक्रिया के चलते तिमाही में विलंब जरूर हुआ, लेकिन ठीक था। उन्होंने बताया कि वे दिसंबर में छमाही की तैयारियों में जुट गए हैं। इसके लिए ऐसे छात्र, जो तिमाही में गैरहाजिर थे, उनके माता-पिता को पत्र भेजकर सूचित किया जा रहा है कि अपने बच्चे को परीक्षा में अनिवार्य रूप से शामिल करें।

सीएमडी के प्राचार्य डा. पीसी जैन ने बताया कि सीएमडी में तिमाही नहीं ली गई थी, लेकिन छमाही की तैयारी चल रही है। परीक्षा में छात्र उपस्थिति रहें इसके लिए कक्षा में ही उन्हें सूचना दी जा रही है। श्री जैन ने कहा कि तिमाही व छमाही परीक्षा की व्यवस्था से कक्षा में छात्रों की उपस्थिति भी बढ़ गई है।

नवीन कन्या कालेज की प्राचार्य डा.भारती भट्टाचार्य ने बताया कि तिमाही के अलावा उनके यहां तीन बार मासिक टेस्ट हो चुका है, जिसका रिकार्ड है। उन्होंने छमाही परीक्षा बड़े स्तर पर नहीं कर पाने, लेकिन आयोजित जरूर करने की बात कही है।

डीपी विप्र कालेज के प्राचार्य डा.पीके तिवारी ने बताया कि तिमाही या छमाही सुनते ही लोग स्कूल में होने वाली परीक्षा की तरह इसे भी मान लेते हैं, लेकिन यहां इनते बड़े स्तर पर यह परीक्षा नहीं होती। परीक्षा के दिन कक्षा में प्रoA बता दिए जाते हैं, उस दिन पढ़ाई नहीं होती। श्री तिवारी ने बताया कि अधिकांश छात्र इसमें रुचि ले रहे हैं। जिन छात्रों की रुचि नहीं है, उनके अभिभावकों को सूचित किया जा रहा है, ताकि भविष्य में कोई परेशानी न हो।

कालेज में कैसे होती है तिमाही-छमाही: कालेजों की तिमाही व छमाही परीक्षा वार्षिक परीक्षा की तरह कड़ाई से नहीं ली जाती। वार्षिक परीक्षा में प्रत्येक विषय के लिए तीन घंटे दिये जाते हैं, वहीं प्रश्नों की संख्या भी पांच से दस होती है। तिमाही व छमाही में ऐसा नहीं होता। यह परीक्षा क्लासरूम में ही होती है। छात्र एवं विषय विशेषज्ञ परीक्षा की तिथि तय करते हैं। परीक्षा का समय तीन घंटे के स्थान पर केवल एक पीरियड (40 मिनट) का होता है। उस दिन पढ़ाई नहीं होती। प्रश्नों की संख्या दो से अधिक नहीं होती। उत्तरपुस्तिकाओं के रूप में छात्र कापी या पेज का इस्तेमाल करते हैं।





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