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जाट सीएम के लिए मांगा सबका साथ

अजमेर. पुष्कर में शनिवार को आयोजित जाट समाज के अधिवेशन में जाट मुख्यमंत्री की मांग फिर उठी लेकिन इस बार समाज के तेवर बदले हुए थे। समाज ने इस मामले में संघर्ष की बजाय समझ पर जोर देते हुए अन्य जातियों के सद्भाव से लक्ष्य हासिल करने पर जोर दिया। अधिवेशन में वक्ताओं ने कहा समाज की जाजम पर आने से पहले राजनीतिक जूते-चप्पल बाहर उतार कर आएं। यहां केवल समाज हित की बात होगी। लेकिन, समाज की एकजुटता में कमी के कारण घटता राजनीतिक असर भी चिंता का विषय रहा।

पुष्कर स्थित जाट विश्राम स्थली में आयोजित समाज के 87 वें अधिवेशन को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री दौलतराम सारण ने कहा कि पहले समाज में शिक्षा और रोजगार की चेतना लाए, सभी को एकजुट करें उसके बाद राजनीतिक क्षेत्र में अपनी शक्ति का प्रदर्शन करें।

अधिवेशन के मुख्य अतिथि और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हेमाराम चौधरी ने कहा कि समाज के लोग आपसी टांग खिंचाई बंद करें और राजनीतिक मतभेद भुलाकर समाज-हित को सवरेपरि रखें।

राजस्थान जाट महासभा के अध्यक्ष राजाराम मील ने कहा कि समाज बहुत से क्षेत्रों में पिछड़ रहा है इसलिए सभी को संगठित होकर आगे आना होगा। तब ही समाज के लोगों का शोषण समाप्त होगा और उन्हें हर क्षेत्र में उचित स्थान मिलेगा।

भाजपा के प्रदेश महामंत्री रामपाल जाट ने कहा कि समाज के विकास के लिए अपने आप में चेतना जागृत करें। शिक्षा की दृष्टि से जाट समाज बहुत पीछे है, समाज में शिक्षा को बढ़ावा दें खास तौर पर बालिका शिक्षा को अनिवार्य करें।

जोधपुर की जिला प्रमुख अमिता चौधरी ने कहा कि समाज में एकता के बल पर ही ओबीसी में आरक्षण मिला था, वही एकता वापस जरूरी है। जाट समाज दूसरे समाजों से दूर हो रहा है, सभी समाजों के लोगों के प्रति सद्भावना और सहानुभूति रखनी होगी। उन्होंने मौसर, सवामणी, बाल विवाह और दहेज जैसी बुराइयों को समाज से दूर भगाकर समाज में शिक्षा, खास तौर पर बालिका शिक्षा की अनिवार्यता पर जोर दिया।

जायल पंचायत समिति के प्रधान रिद्धकरण चौधरी ने कहा आर्थिक दृष्टि से सुदृढ़ होना है तो बुराइयों का अंत करें और समाज को शिक्षित बनाएं। अजमेर जिला प्रमुख सरिता गेना और कांग्रेस की सचिव सरोज चौधरी आदि ने भी समाज के लोगों को संबोधित करते हुए सामाजिक बुराइयों के अंत और शिक्षा को बढ़ावा देने की बात कही। सभा का संचालन लक्ष्मण सिंह ने किया।

सीधे टकराव से परहेज
अधिवेशन में अधिकतर वक्ताओं ने दलगत राजनीति से बचते हुए भाषण दिए लेकिन कुछ वक्ता इसके अपवाद रहे। इनमें जाट महासभा के अध्यक्ष राजाराम मील ने भाजपा सरकार पर खुलकर प्रहार किए। मील के अलावा जाट महासभा की सचिव निर्मला आर्य ने जाट मुख्यमंत्री की मांग उठाई लेकिन वक्ताओं ने उस पर सीधे चर्चा की बजाय यह कहा कि मुख्यमंत्री बनाना अकेले जाट समाज के बस में नहीं है। युवा नेता बीएल चौधरी को भी युवाओं के दबाव से राजनीतिक भाषण देने का मौका दिया गया।





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