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भाजपा-अकाली दल फिर आमने-सामने

जालंधर.

इस फैसले पर अकाली व भाजपा फिर आमने-सामने हैं। पंजाब भाजपाध्यक्ष राजिंदर भंडारी ने इस मुद्दे को सीएम से उठाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि हाईकमान के निर्देशानुसार भाजपा इस मुद्दे को सार्वजनिक मंच से नहीं उठाएगी।

ये करेगी भाजपा :

भाजपा हाईकमान को समझाने का प्रयास करेगी कि जो बोर्ड व निगम मुनाफे में हैं और जिनका विनिवेश करने का सरकार का इरादा नहीं, उनकी चेयरमैनशिप भाजपा को मिलनी चाहिए। भाजपा यह मुद्दा 28 नवंबर की बैठक में उठाएगी।

इन निगमों-बोर्डो पर दावेदारी :

पंजाब स्टेट बिजली बोर्ड, पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, पंजाब हेल्थ सिस्टम कॉपरेरेशन, पंजाब वाटर सप्लाई और सीवरेज बोर्ड, पंजाब लोक सेवा आयोग। बिजली बोर्ड में अमरिंदर सिंह के समर्थक व पूर्व आईएएस अफसर वाई.एस. रतड़ा चैयरमैन बने हैं। लोक सेवा आयोग के चेयरमैन भी कैप्टन समर्थक पूर्व आईएएस अफसर एस.के. सिन्हा हैं। बादल सरकार बनने पर भी इन दोनों को नहीं हटाया गया।

बड़ी मांग :

टोहड़ा खेमा भी बड़ी चेयरमैनियां मांग रहा है। खास तौर पर, मालवा से चुनाव हराने वाले टोहड़ा के दामाद हरमेल सिंह टोहड़ा, महेश इन्द्र ग्रेवाल, बलदेव मान, बादल समर्थक गुरदेव बादल, बलविंदर भूंदड़, तोता सिंह, जगदीश गरचा, रणजीत तलवंडी, गगनजीत बरनाला, कैप्टन कंवलजीत सिंह के बेटे जसजीत बन्नी, बीबी जागीर कौर, कुलदीप वडाला, अरविंदर पाल सिंह पखोके, सेवा सिंह सेखवां प्रबल दावेदार हैं।





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