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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. विश्व में करीब आठ लाख लोगों की हर साल लंग्स कैंसर से मौत हो रही है, जिनमें से करीब 90 फीसदी को लंग्स कैंसर का कारण स्मोकिंग होता है। अगर लंग्स कैंसर को जल्दी डिटेक्ट कर लिया जाए तो मरीज के सर्वाइवर को बढ़ाया जा सकता है।
यह बात इटली से आए डॉ. स्टीफेनो गेसपारीनी ने पीजीआई में चल रही नेशनल एनुअल पल्मोनरी डिजीज कॉन्फ्रेंस के दौरान कही। डॉ. स्टीफेनो ने कहा कि वैसे तो लंग्स कैंसर के कई कारण हैं, लेकिन मुख्य कारण स्मोकिंग है, इसीलिए स्मोकिंग करने वाले लोग लंग्स कैंसर की हाई रिस्क कैटेगरी में गिने जाते हैं।
डॉ. स्टीफेनो ने कहा कि लंग्स कैंसर से पीड़ित 75 फीसदी मरीज आखिरी स्टेज में हॉस्पिटल पहुंचते हैं। अगर यह बीमारी जल्दी पकड़ ली जाए तो इसे ठीक तो नहीं किया जा सकता, लेकिन सर्वाइवर रेट को बढ़ाया जा सकता है। जो लोग बहुत ज्यादा स्मोकिंग करते हैं, उन्हें 10-15 साल के बाद हर छह महीने में चेस्ट का एक्स-रे कराते रहना चाहिए।
इसके अलावा यूरोपियन रेस्पीरेटरी सोसायटी के स्पीकर्स ने एयर पॉल्यूशन और रेस्पीरेटरी हेल्थ पर विस्तार से चर्चा की।
इटली से आए डॉ. जियोवानी ने बढ़ते एयर पॉल्यूशन के बारे में कहा कि आज दिन पर दिन एयर पॉल्यूशन बढ़ता जा रहा है, जिसमें सबसे ज्यादा एयर पॉल्यूशन विकासशील देशों में है, यही कारण है कि इन देशों में लोगों को सांस से संबंधित बीमारियां ज्यादा हो रही हैं।