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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. कालेजों में सहायक प्राध्यापकों की संविदा भर्ती में हाईकोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। संविदा सहायकों प्राध्यापकों की आठ महीने की नौकरी में चुनिंदा अभ्यर्थियों को मनचाहे कालेज में पदस्थापना दे दी गई है। इस काम को कुछ विशेष अभ्यर्थियों के लिए चुपचाप ढंग से किया गया है।
सरकंडा (बिलासपुर) के कौशल कुमार विश्वकर्मा ने इसकी शिकायत राज्यपाल और मुख्यमंत्री से की है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा कालेजों में सहायक प्राध्यापकों के 769 रिक्त पदों में संविदा नियुक्ति की गई। हाईकोर्ट ने एक रिट याचिका में शासन के सभी विभागों को साफ निर्देश दिए थे कि एक ही पद पर दो व्यक्तियों की नियुक्ति या पदस्थापना न करें। लेकिन सहायक प्राध्यापकों की भर्ती में इसकी खुलेआम धज्जियां उड़ाई गई।
राजनीतिक पहुंच रखने वाले अभ्यर्थियों की पदस्थापना ऐसे जगह कर दी गई है जिन कालेजों में पद खाली ही नहीं हैं। यानि जहां पद खाली हैं वहां किसी की नियुक्ति नहीं हुई। जहां पद भरे हुए हैं वहां सहायक प्राध्यापक सरप्लस हो गए। शिकायतकर्ता ने बताया कि शासकीय साइंस कालेज बिलासपुर में रसायन विषय और शासकीय पीजी कालेज बिलासपुर में अंग्रेजी व हिंदी के सहायक प्राध्यापक को तबादला दे दिया गया है।
इनका मूल पद दूसरे कालेज में है। इसी तरह जांजगीर के प्राध्यापक को सीपत, खरसिया के प्राध्यापक को बिलासपुर भेज दिया गया है। इससे उन कालेजों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। शिकायतकर्ता का दावा है कि पूरी भर्ती में इस तरह के सौ से ज्यादा मामले हैं। उनका कहना है कि संविदा नियुक्ति प्राध्यापकों की कमी को देखते हुए की गई थी। लेकिन कालेजों में अभी भी पद रिक्त हैं। ऐसे में संविदा नियुक्ति करने का क्या लाभ। श्री विश्वकर्मा ने पूरे मामले के जांच की मांग की है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विभाग ने सभी कालेजों से प्राचार्यो से रिक्त पदों की जानकारी मंगाई है। उन्हें 14 दिसंबर तक सूची भेजने के निर्देश दिए गए हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि रिक्त पदों पर ही भर्ती की गई है। कुछ महिलाओं ने पारिवारिक कारणों से दूसरी जगह तबादले का आवेदन किया था। इसलिए उनकी पद स्थापना दूसरी जगह की गई है। इस मामले में उच्च शिक्षा संचालक केडीपी राव का कहना है कि उनके पास ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है।