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नई दिल्ली. ठीक मोबाइल कंपनियों की तरह आप बोनस खोए बगैर मेडिक्लेम देने वाली बीमा कंपनी भी बदल सकेंगे। अप्रैल 2008 से मेडिक्लेम पालिसी के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया जा रहा है। जो पालिसीधारक कंपनी की सेवाओं से खुश नहीं होंगे, वे कंपनी बदल पाएंगे और उन्हें संचयी बोनस से हाथ नहीं धोना पड़ेगा।
गैरजीवन बीमा कंपनियों के संगठन जनरल इंश्योरेंस काउंसिल मेडिक्लेम पोर्टेब्लिटी के नए नियम तैयार कर रही है। अप्रैल 2008 से ये नए नियम लागू होने की संभावना है।
महासचिव के एन भंडारी ने बताया कि काउंसिल दिशानिर्देश तैयार कर रही है। जनवरी तक उसकी सिफारिशें तैयार हो जाएंगी। सिफारिशों को बीमा प्राधिकरण (इरडा) के पास भेजा जाएगा। उम्मीद है कि नए वित्त वर्ष में नए नियम अस्तित्व में आ जाएंगे।
क्या होंगे बदलाव : बीमा कंपनियों की पालिसी समान नहीं हैं, इसलिए ऐसे न्यूनतम लाभ तय किए जाएंगे जो कंपनी बदलने पर जरूर मिलें।
क्या हैं परेशानियां : भंडारी ने बताया कि लोग लगातार शिकायतें करते थे कि मेडिक्लेम पालिसी में पोर्टेब्लिटी नहीं होने के कारण ग्राहकों के हित सुरक्षित नहीं थे।
* मौजूदा व्यवस्था में बीमाधारक को एक साल की पालिसी दी जाती है। उसका 12 माह के लिए नवीनीकरण किया जाता है।
* अगर कोई क्लेम नहीं होता है तो पालिसीधारक को जमा राशि के रूप में बोनस दिया जाता है। हर साल क्लेम नहीं होने पर ऐसा बोनस मिलता है।
* व्यक्ति अवधि खत्म होने पर कंपनी बदलना चाहे तो उसे बोनस से हाथ धोना पड़ता है।
* कोई व्यक्ति सीनियर सिटीजन बनने से पहले पालिसी लेता है तो कंपनी बदलना उनके लिए ज्यादा मुश्किल होता है। सीनियर सिटीजन को कंपनियां नई पालिसी नहीं देतीं।