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चांदपाठा में 17 फीट का ‘मगरमच्छ’

शिवपुरी. चांदपाठा झील मगरमच्छों के लिए मुफीद साबित हो रही है। वर्ष 2005 में की गई गणना में इस झील में महज 40 मगरमच्छ ही पाए गए थे, पर अब यह संख्या बढ़कर एक सैकड़ा को पार कर गई है और इनमें एक 17 फीट का लंबा मगरमच्छ भी है, जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। हालांकि ‘मगरमच्छ’ इंसान का शिकार करने पर आमादा हैं, इसकी परिणति वे दो घटनाएं हैं, जो झील में घटित हो चुकी हैं।

शिवपुरी में ‘मगरमच्छ’ प्रकृति की देन है। यहां ‘मगरमच्छ’ न केवल चांदपाठा झील में पाए जाते हैं, बल्कि जाधव सागर समेत इससे जुड़े नालों में भी ‘मगरमच्छ’ निकलते रहे हैं। नेशनल पार्क प्रबंधन की मानें तो जनवरी 2005 में जो गणना हुई थी, उसके मुताबिक झील में 40 मगरमच्छ थे।

ढाई साल गुजरने के बाद विभाग के अफसरों का अनुमान है कि चांदपाठा झील में एक सैकड़ा से अधिक ‘मगरमच्छ’ हो गए हैं। इनमें बच्चे से लेकर 17 फीट लंबे ‘मगरमच्छ’ भी शामिल हैं। 17 फीट का ‘मगरमच्छ’ देखने के लिए वाइल्ड लाइफ में रुचि रखने वाले पर्यटक नेशनल पार्क में देखे जा रहे हैं।

बीते रोज नेशनल पार्क के स्टाफ को मगरमच्छ, सांप और अन्य जानवर पकड़ने की ट्रेनिंग देने आए सर्प विशेषज्ञ बैजू और वन विहार भोपाल स्थित भालू संरक्षण केन्द्र की मैनेजर प्रेरणा शर्मा ने भी पार्क के स्टाफ के साथ चांदपाठा झील का भ्रमण किया तो 17 फीट का यह ‘मगरमच्छ’ नजर आया, जो उन्होंने अपने कैमरे में भी कैद किया।

इन लोगों का कहना था कि सर्दी के मौसम में नेशनल पार्क में जानवरोंे की तुलना में झील के इर्द-गिर्द मगरमच्छ अधिक नजर आते हैं। उसकी वजह यह है कि मगरमच्छ सर्दी में पानी से बाहर आकर किनारों पर धूप की ओर मुंह कर थकान दूर करते हैं और ये दृश्य इन दिनों अपने कैमरे में कैद करना पर्यटकों के लिए काफी आसान है।

पार्क के डायरेक्टर आलोक कुमार का कहना है कि चांदपाठा झील के निकट ही भदैयाकुंंड और करबला है, जहां लोग नहाने के लिए आते हैं। दो बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जब ‘मगरमच्छ’ का शिकार इंसान बने हैं, इसलिए ‘मगरमच्छ’ से यहां आने वाले लोगों को सावधान करने के लिए टूरिस्ट विलेज, भदैयाकुंड, करबला आदि स्थानों पर ‘मगरमच्छ’ से सावधानी के लिए बोर्ड लगाए गए हैं।

उनका कहना है कि इन स्थानों पर पानी में उतरकर नहाने वालों को रोकने व समझाइश देने के लिए दो वेतनभोगी कर्मचारियों को तैनात किया गया है। इसके अलावा टूरिस्ट विलेज के वोट हाउस पर भी एक बोर्ड लगाया गया है, ताकि बोट में बैठने से पूर्व कोई भी व्यक्ति अपने पैर या हाथ झील के पानी में न डालें।

..तो कहां जाएंगे ‘मगरमच्छ’
चांदपाठा झील प्राकृतिक और बेहद सुंदर है। आमतौर पर इसमें पानी रहता है, पर इस बार अल्प वर्षा के कारण ये हालात बन रहे हैं कि झील सूखने की स्थिति में है। एक हिस्सा तो पूरी तरह से सूख गया है, पर दूसरी ओर 15 फीट तक पानी है।

‘मगरमच्छ’ के प्रेमियों और वाइल्ड लाइफ के जानकारों की चिंता इस बात को लेकर है कि यदि झील का पानी सूख जाएगा और फिर कीचड़ शेष रह जाएगी तो मगरमच्छों की प्रजाति संकट में पड़ जाएगी। इसके साथ नेशनल पार्क में विचरण करने वाले जानवरों पर भी बन आएगी। पांच साल पूर्व ऐसा हो चुका है।

उस समय चांदपाठा झील पूरी तरह से सूख गई थी और तब उसका गहरीकरण किया गया था। अब हालात ऐसे ही हो चले हैं। इस बारे में माधव नेशनल पार्क के डायरेक्टर आलोक कुमार का कहना है कि यदि ऐसा हुआ तो वे चांदपाठा झील से माधव लेक के लिए दिए जाने वाले पानी को रोक देंगे।





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