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दो गांवों में रात को भी उगता है सूरज

इंदौर. जिले के दो गांवों में सौर ऊर्जा का विकल्प अपनाकर रोशनी की नई इबारत लिखी गई। न बिजली गुल होने का डर न किसी अधिकारी के चक्कर काटने की जरूरत। उजाला भले ही कम हो लेकिन रहता जरूर है।

ये रोशन मिसाल है इंदौर तहसील के नाहर झाबुआ और महू तहसील के कोपरवेल की। घने जंगलों के कारण आजादी के 60 साल बाद भी बिजली के तार वहां तक नहीं पहुंचे। परेशानी बढ़ी तो उपाय भी सूझा। अब सड़क से घर तक सबकुछ रोशन है।

दोनों गांवों में अपारंपरिक ऊर्जा स्रोत मंत्रालय भारत सरकार और ऊर्जा विकास निगम, मप्र शासन ने जिला पंचायत से मिलकर ‘उषा किरण ऊर्जा ग्राम परियोजना’ के तहत सोलर लाइट लगाई। दोनों गांवों में ५क् होम लाइट (एक बत्ती) और १२ स्ट्रीट लाइट लगाने पर ३.१८ लाख रुपए खर्च हुए। निगम ने जिला पंचायत से ऐसे और गांवों की सूची भी मांगी है।

11 गांव और 32 स्ट्रीट लाइट :
तिल्लौर खुर्द, गढ़ी, नाहर खोदरा, रोलाय, ओसरा और लोहगढ़ जैसे जिले के 10 गांवों की सड़कों को ३२ सोलर स्ट्रीट लाइट से रोशन किया गया है। एक लाइट पर करीब ३२ हजार रुपए खर्च आता है।

बिजली लेगी हजारों पेड़ों की बलि :
दोनों गांव घने जंगल में हैं। जिला पंचायत सीईओ आशुतोष अवस्थी के अनुसार वहां बिजली पहुंचाने के लिए हजारों पेड़ काटना होंगे। ऐसे में सोलर लाइटिंग ही सस्ता और बेहतर विकल्प है।





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