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पंचकर्म से विकसित होगा शहर में ‘आयुर्वेद पर्यटन’

जयपुर. पिंक सिटी जल्द ही ‘आयुर्वेद पर्यटन’ का नया केंद्र बनकर उभरेगी। इसके लिए राष्ट्रीय आयुर्वेदिक संस्थान ‘माधो विलास’ में पंचकर्म सुविधाओं को आयुर्वेद पर्यटनअत्याधुनिक मशीनों से जोड़ा जाएगा। इससे इलाज कम समय में और कारगर सिद्ध होगा। संस्थान में देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए इलाज के लिए स्पेशल पैकेज बनाए जाएंगे। पर्यटन सीजन में आने वाले पर्यटकों की देखभाल के लिए अलग से विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद रहेंगे। पर्यटकों की स्वेच्छा पर उन्हें भर्ती करने की भी व्यवस्था की जाएगी। पर्यटक ऑनलाइन भी पंचकर्म की जानकारी ले सकेंगे।

स्वास्थ्य पर्यटन (हैल्थ टूरिज्म) की विभिन्न कड़ियों को जोड़ने के लिए केन्द्र सरकार लगभग 1 करोड़ रुपए खर्च करेगी। इसके बाद शहर में पंचकर्म आम लोगों की पहुंच में होगा। संस्थान में पंचकर्म की विभिन्न पद्धतियों के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों का पैनल मौजूद रहेगा। माधो विलास में पहले से ही मरीजों के नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था है। हालांकि अब पंचकर्म में काम आने वाली दवाओं और लेप की व्यवस्था के लिए मरीजों को मिनिमम चार्ज देना पड़ेगा।

पंचकर्म पद्धतियों के लिए संस्थान के जीर्ण-शीर्ण पड़े प्राचीन माधो विलास भवन में अत्याधुनिक फर्नीचर और मशीनों की फिटिंग का काम शुरू किया जा चुका है। आयुर्वेदिक पद्धतियों में काम आने वाले गर्म पानी की व्यवस्था के लिए डेढ़ लाख की लागत से सौर ऊर्जा प्लांट लगाया गया है। इसकी क्षमता 1 हजार लीटर पानी की है। पंचकर्म विभाग का कार्य देख रहे प्रो. कमलेश शर्मा बताते हैं कि अगले साल मार्च तक मरीज इन सुविधाओं का फायदा उठा सकेंगे।

इन रोगों का होगा इलाज
लकवा, गठिया, साइटिका, जोड़ों का दर्द, पाचन संबंधी बीमारियां, नजला (पुराना जुकाम), अनिद्रा, अवसाद, आसियोपोरोसिस (हड्डियों का खोखलापन), स्पोंडिलाइटिस (गर्दन, कमर और पीठ दर्द) आदि रोगों का इलाज पंचकर्म पद्धतियों से होगा। इन पद्धतियों में विभिन्न लेपों से साधारण मसाज, स्वेदन (भाप देना), शिरोधारा, वमन-विरेचन (उल्टी-दस्त करवाकर) और बस्ती कर्म (दवाओं से तैयार एनिमा) किया जाएगा।

यूं होगी व्यवस्था पंचकर्म विभाग के लगभग 25 कमरों में महिला-पुरुषों के लिए अलग-अलग मसाज केन्द्र बनाए जाएंगे। साथ ही वातानुकूलित कॉटेज वार्ड बने होंगे। इसके अलावा दवाइयां तैयार करने के लिए मेडिकल कक्ष सहित अत्याधुनिक लेबोरेट्री और विशेष परिस्थितियों में क्षार सूत्र बंधन (मेडिकल धागे) से शल्य क्रिया करने के लिए एक ऑपरेशन थिएटर भी बनाया जाएगा। विभिन्न पद्धतियों के लिए काम आने वाली मशीनों को केरल व अहमदाबाद से मंगवाया जा रहा है।

* माधो विलास में पंचकर्म सुविधाओं के बाद शहर में आयुर्वेद पर्यटन को नई दिशा मिलेगी। साथ ही आम लोगों को सस्ते में इलाज मिल सकेगा।
—प्रो. महेशचंद शर्मा, निदेशक, राष्ट्रीय आयुर्वेदिक संस्थान





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