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मुंबई.
ईसा मसीह पर केंद्रित फिल्म ‘द दा विंची कोड’ (2006) के बाद अब हालीवुड की नई फिल्म ‘अक्वेरियन गोस्पेल’ की बारी है। यह फिल्म ईसा मसीह के युवा दिनों व उनकी भारत यात्रा के बारे में है और यही विवाद की जड़ है।
बाइबल में इस कालखंड को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। इसीलिए पादरियों का कहना है कि इस फिल्म के माध्यम से हालीवुड भ्रम पैदा कर बाइबल की विश्वसनीयता को ही कटघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहा है।
ऐसी है कहानी फिल्म की कहानी ईसा मसीह के जीवनकाल के 13 से 30 वर्ष के कालखंड के बीच की है। फिल्म में उन्हें भारत यात्रा पर दिखाया गया है। भारत में वे बौद्ध विहार में रहे। उन्हें जाति प्रथा के विरोध में कहते हुए और उन पर पूर्वी धर्र्मो का प्रभाव भी दिखाया गया।
विवाद की वजह
युवा ईसा के जीवन पर 1908 में लेवी एच डॉवलिंग ने काफी रिसर्च के बाद ‘द अक्वेरियन गोस्पेल आफ जीजस द क्राइस्ट’ नामक किताब लिखी थी। इसे ही इस फिल्म का आधार बनाया गया है। पादरियों के अनुसार बाइबल में सिर्फ इतना जिक्र है कि ‘इस काल में वे बुद्धि और महिमा के बीच बड़े हुए’ और उनकी भारत यात्रा का कोई उल्लेख नहीं है। इस वजह से यह फिल्म बाइबल की विश्वसनीयता को ही संदेह के घेरे में ले आती है।
अन्य विवादित फिल्में
>> लाइफ आफ ब्रिअन (1979) >> द लास्ट टेंपटेशन आफ क्राइस्ट (1988) >> द दा विंची कोड (2006) >> एलिजाबेथ : द गोल्डन एज (2007)
‘फिल्म उन दिनों की कहानी बताएगी जब ईसा मसीह ने पूर्वी देशों की परंपरा का अध्ययन किया।’
ड्रेव हेरिओट, निर्देशक अक्वेरियन गोस्पेल
‘‘कई फिल्में र्आई और र्गई। इससे संदेह पैदा होगा कि क्या सच है और क्या नहीं।’
बाबू जोसेफ, प्रवक्ता, कैथोलिक बिशप कांफ्रेंस आफ इंडिया