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पांचना की एक बूंद छोड़ने नहीं देंगे

करौली (ग्रामीण). पांचना बांध से जुड़े चार जिलों के किसानों ने रविवार को यहां एक सभा कर घोषणा की कि बांध का एक बूंद पानी भी छोड़ने नहीं देंगे। उधर पांचना की एक बूंद छोड़ने नहीं देंगेकमांड एरिया के किसानों का कहना है कि नहर तो खुलकर रहेगी। इस बीच विवाद सुलझाने के लिए सरकार ने भाजपा महामंत्री रामपाल जाट को क्षेत्र में भेजा है।

चालीस गांवों के किसानों की सभा में महापड़ाव व बांध के पानी की निगरानी 4 दिसंबर तक बढ़ाने और 5 दिसंबर को बांध पर महापंचायत का निर्णय लिया गया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि बांध के पानी पर पहला हक उनका है। इसके बाद गंभीर नदी के किनारे बसे 360 गांवों को पानी दिया जा सकता है। वक्ताओं ने कहा कि वसुंधरा सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया है। दो साल पहले सरकार ने माना था कि किसानों को पांचना का पानी मिलना चाहिए।

इसके लिए गुड़ला लिफ्ट परियोजना के सर्वे की स्वीकृति दी और परियोजना पर शीघ्र ही कार्य शुरू करने का आश्वासन दिया, लेकिन यह कागजों में ही सिमटा रहा। वक्ताओं ने कहा कि संघर्ष समिति के सदस्य अब अपनी मांगों को लेकर मंत्रियों के पास जयपुर नहीं जाएंगे, बल्कि अगर उन्हें वार्ता करनी है तो वे बांध पर आ सकते हैं। इस मौके पर वित्त राज्यमंत्री वीरेन्द्र मीणा के खिलाफ रोष जताते हुए निंदा प्रस्ताव पारित किया। वक्ताओं का आरोप था कि मंत्री मीणा एक पक्ष के किसानों को नहरों में पानी छोड़ने का आश्वासन दे गए, जबकि उन्होंने दूसरे पक्ष के किसानों से वार्ता करना उचित नहीं समझा।

सभा को किसने किया संबोधित : सभा को गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला, पूर्व राज्यसभा सदस्य शिवचरण सिंह गुर्जर, प्रदेश प्रवक्ता डॉ. रूपसिंह गुर्जर, ट्रक यूनियन करौली के अध्यक्ष भरतसिंह गुर्जर, गुडला पांचना संघर्ष समिति के सदस्य अशोक सिंह गुर्जर, बयाना के पूर्व विधायक जगन सिंह, धौलपुर के पूर्व जिला प्रमुख दुर्गासिंह, खेड़ला के महेन्द्र सिंह, करौली के शिवनारायण कप्तान, संघर्ष समिति के हरनारायण पटेल, पंचायत समिति करौली के उप प्रधान सियाराम गुर्जर, संघर्ष समिति के प्रवक्ता रमेश गुर्जर, पूर्व ट्रक यूनियन अध्यक्ष रामसहाय पटेल, लपावली के सरपंच हरगुन सिंह, डूंगरसिंह, हब्बू पटेल आदि ने संबोधित किया।

सुबह से पहुंचने लगे किसान
सुबह से ही विभिन्न रंगों की पगड़ियों से सजे-धजे किसान विभिन्न वाहनों से पांचना बांध पर पहुंचना शुरू हुए। लगभग दो बजे संघर्ष समिति के अध्यक्ष हरनारायण पटेल की अध्यक्षता में किसान सभा शुरू हुई। इसमें करौली, सवाईमाधोपुर, धौलपुर व भरतपुर जिलों से हजारों किसान शामिल हुए। सभा में महिलाओं ने भी भागीदारी निभाई।

किसने क्या कहा
* सरकार की नीति है कि खेत का पानी खेत में। इसलिए पांचना का पानी भी पांचना के समीपवर्ती गांवों के किसानों को मिलना चाहिए।
डा. रूपसिंह गुर्जर, प्रवक्ता प्रदेश गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति

* पानी के लिए इतने बड़े समाज को संघर्ष करना पड़े यह सरकार के लिए शर्म की बात है। शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे किसानों पर अन्य समाज के लोग हथियार लेकर चढ़ाई कर रहे हैं। भरतपुर जिले के 400 गांवों का बच्च-बच्च संघर्ष समिति के साथ है। पहले भरतपुर के किसान को गोली लगेगी, उसके बाद करौली जिले के किसान को।
जगन सिंह, पूर्व विधायक, बयाना

* सरकार को हमारा बाजिव काम करना चाहिए, लेकिन हमें भी सरकार के सामने अपना पक्ष पूरी तैयारी के साथ रखना चाहिए। पांचना बांध के पानी पर समीपवर्ती गांवों के किसानों का हक है। दुर्गासिंह, पूर्व जिलाप्रमुख , धौलपुर

* लिफ्ट का काम जब तक चालू नहीं हो जाएगा, तब तक नहरों में किसी भी सूरत में पानी नहीं जाने देंगे।
भरतसिंह गुर्जर, गुडला पांचना संघर्ष समिति सदस्य

* राज्य सरकार दोहरा व्यवहार कर रही है। सरकार एक पक्ष के किसानों से बात करने के लिए मंत्री को भेज रही है, जबकि हमसे बात करने के लिए कलेक्टर को ही भेजा जा रहा है। मंत्रियों को बात करनी है तो यहां आकर लें।
अशोक सिंह गुर्जर, गुड़ला पांचना संघर्ष समिति सदस्य

* पानी पर पहला हक बांध के समीपवर्ती गांवों का है। इसके बाद गंभीर नदी के किसानों का। अन्याय को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। हमें पानी की रक्षा शांतिपूर्ण तरीके से करनी है। जिसे तोप छोड़नी है तो छोड़ दे, हमारे कुछ फर्क नहीं पड़ने वाला।
कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला, संयोजक प्रदेश गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति





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