|
भोपाल. यूं तो राजधानी में ऐसे स्थानों की कमी नहीं जो यहां की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। लेकिन दूसरी तरफ ऐसी भी कई जगहें हैं जो खूबसूरत होने के बावजूद उजाड़ और वीरान पड़े हैं।
इनकी ये हालत इसलिए है क्योंकि इन पर न तो कभी ध्यान दिया जाता है और न ही इनका रखरखाव किया जाता है। प्रशासन यदि ध्यान दे और इनका सौन्दर्यीकरण करे तो इन वीरानों में न केवल नई जान आ जाएगी बल्कि पर्यटकों की संख्या भी बढ़ जाएगी।
प्रेमपुरा घाट :
भदभदा रोड से वन विहार जाने वाली सड़क पर स्थित प्रेमपुरा घाट चारों ओर से हरियारी से भरा हुआ है। बड़े ताल से सटे किनारे पर बने इस घाट की खूबसूरती देखते ही बनती है। यहां पर नगर निगम ने पर्यटकों को लुभाने के लिए चार हट बनाए थे मगर वो कभी शुरू नहीं हो पाए। उसके बाद नगर निगम ने इस स्थान का इस्तेमाल होर्डिग्स और पुराने वाहन रखने के लिए शुरू कर दिया। इस स्थान का इस्तेमाल केवल गणोश और दुर्गा विर्सजन के लिए किया जाता है। इस जगह को यदि पर्यटको को ध्यान में रख डेवलप कर दिया जाए तो यहां आने वालों की संख्या तो बढ़ेगी ही, बड़े तालाब पर बढ़ती भीड़ का दबाव भी कम होगा।
सारंग पाणी लेक के पार्क :br<> पिपलानी में मौजूद सारंग पाणी लेक के पास बना पार्क बेहद खूबसूरत है मगर अव्यवस्थाओं के चलते यहां का हाल भी बेहाल है। यहां पहले लोगों के लिए बोटिंग की सुविधा हुई करती थी। मगर अब वो बंद हो चुकी है। पार्क के अंदर कुछ भी व्यवस्थित नहीं रहा। अंदर बैठने तक की कोई व्यवस्था नहीं है। तालाब किनारे लोगों ने इतनी गंदगी फैला दी है कि यहां हर वक्त बदबू रहती है। यहां फाउटेंन के लिए जगह तो है मगर वह भी खाली पड़ी है। तालाब के जिस किनारे से बोटिंग होती थी वह अब कचरे और गंदगी से भरा हुआ है। प्रशासन को इस स्थान में भी ध्यान देने की जरूरत है।
छोटे तालाब के पार्क :
छोटे तालाब की खूबसूरती निहारने के लिए यूं तो लिली टाकीज के पास और मछली घर के सामने पार्क बने हुए हैं मगर लिली टाकीज के पास वाले पार्क के आसपास से आने वाली बदबू के चलते लोग वहां कम ही जाते है। अब बचा मछली घर के सामने स्थित पार्क। कुछ दिनों पहले ही यहां रिनोवेशन हुआ है मगर इसी मार्ग पर एमव्हीएम कालेज के पीछे स्थित दूसरा पार्क आज भी बदहाल है। यहां पर बैठने और लाइट की कोई व्यवस्था नहीं है। साथ ही यहां खाने-पीने की कोई व्यवस्था भी नहीं है। यही वजह है कि यहां आने वालों की संख्या न के बराबर है।