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भोपाल. पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने वैकल्पिक रहवास तथा ईधन और बढ़ती जनसंख्या को विज्ञान के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां बताया है। वे राजधानी में रविवार को भारतीय विज्ञान सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
डा. कलाम ने अपने उद्बोधन की शुरुआत में बताया कि रविवार की सुबह बच्चों ने उनसे पूछा कि क्या तकनीकी विकास देश की गरीबी को खत्म कर सकता है? क्या कोई उन्हें वैज्ञानिक बनने के लिए प्रेरित कर सकता है? पूर्व राष्ट्रपति ने इसे गंभीर सवाल बताया तथा कहा कि इसका जवाब ‘पुरा’ याने प्रोवाइडिंग अरबन एमेनिटिज इन रूरल एरिया है। हमें शहरी सुविधाओं को गांवों तक ले जाना होगा।
उन्होंने विज्ञान की बेहतरीन उपलब्धियों का जिक्र तो किया किंतु यह भी कहा कि जब तक हम विज्ञान और तकनीक के जरिए गरीबी, बीमारी, सूखा,आदि को समाप्त नहीं कर सकते, तब तक हमारे प्रयास निर्थक होंगे। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा कि पिछले वर्ष डा. कलाम ने जो 11 सूत्री कार्यक्रम प्रदेश के विकास के लिए सुझाया था उसका पूरी तरह पालन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन से उभरे दृष्टिपत्र और अनुशंसाओं को लागू किया जाएगा। केंद्रीय कार्मिकी मंत्री सुरेश पचौरी ने टिकाऊ विकास को आज की जरूरत बताया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि इस सम्मेलन को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार विज्ञान और तकनीकी सलाहकार समिति का गठन करने जा रही है। जिसमें इसरो के डा.माधवन नायर तथा सुपर कंप्यूटर के जनक विजय भाटकर ने शामिल होने की स्वीकृति दी है।
कार्यक्रम की शुरूआत में विज्ञान भारती के अध्यक्ष केआई वासु ने विज्ञान सम्मेलन में वरिष्ठ वैज्ञानिकों के अलावा स्थानीय ज्ञान परंपराओं का उपयोग करने वालों के शामिल होने को इसकी उपलब्धि कहा। मेपकास्ट के महानिदेशक डा. महेश शर्मा ने सम्मेलन में हुए चिंतन की दस प्रमुख अनुशंसाएं प्रस्तुत की।
उन्होंने बताया कि अगला भारतीय विज्ञान सम्मेलन 2009 में उत्तराखंड या उत्तरपूर्व के राज्य में होगा। इस बीच क्षेत्रीय सम्मेलन भी आयोजित किए जाते रहेंगे। ऐसे आयोजन हर दो साल में करने का निर्णय भी लिया गया है।
भारतीय विज्ञान सम्मेलन की अनुशंसाएं :
- भारतीय पंरपरा और आधुनिक विज्ञान का समन्वय - क्षेत्रीय भाषाओं में वैज्ञानिक संवाद - जलभूमि एवं वानस्पतिक संसाधनों का संरक्षण संवर्धन - कृषि को संकट से उभारने के लिए नई हरित क्रांति की जरूरत। - कुपोषण दूर करने के लिए दलहन तिलहन उत्पादन पर जोर - पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ आधुनिक चिकित्सा विज्ञान से इलाज- पर्यावरण वन का संरक्षण- वैकल्पिक उर्जा स्त्रोतों का उत्पादन सुनिश्चित करना- स्कूल स्तर से विज्ञान तकनीकी शिक्षण की व्यवस्था
खुलेंगे केंद्र :
इसरो के अध्यक्ष जी माधवन नायर ने समापन समारोह में घोषणा की कि मध्यप्रदेश में 20 ग्रामीण संसाधन केंद्र खोले जाएंगे। जिनमें सेटेलाईट के माध्यम से शिक्षा का प्रचार प्रसार, टेलीमेडिसीन, खेती, सूखा, ईगर्वेनेंस जैसे कार्य होंगे। देश भर में ऐसे 250 केंद्र संचालित हो रहे हैं।