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झगड़े तो हर परिवार में होते हैं : आमिर

मुंबई.आमिर ‘डीएनए-भास्कर’ से इंटरव्यू के निर्धारित समय से एक घंटा देरी से पहुंचे, लेकिन इससे पहले उनके घर में लोग समझ नहीं पा रहे थे कि आमिर से कैसे संपर्क करें। आते ही आमिर ने उक्त टिप्पणी की। वैसे आमिर आश्चर्यजनक ढंग से जनता से जुड़े हैं।

आप काफी प्राइवेट किस्म के इंसान हैं, लेकिन फिर भी आपकी निजी जिंदगी की बातें समय-समय पर सुर्खियों में आती रही हैं। आप इससे कैसे निबटते हैं?

* मैं नहीं समझता ऐसा कोई परिवार है, जिसमें झगड़ा या विवाद का कोई मुद्दा नहीं होगा। मैं चूंकि एक हस्ती हूं, इसलिए मेरे विवाद सार्वजनिक हो जाते हैं। अखबारों में छपते हैं और लोग उनके बारे में चर्चा करने लगते हैं। मैं समझता हूं हस्ती होने की यही कीमत चुकानी पड़ती है। ऐसे में मैं कुछ नहीं कर सकता। मीडिया को इन दिनों सनसनी की जरूरत होती है। यही वे चाहते हैं। मेरा यह भी मानना है कि मीडिया अभी परिपक्व नहीं हुआ है, जहां उससे जुड़े लोग तय कर सकें कि खबर क्या होनी चाहिए। किसी की निजी समस्या निश्चित रूप से राष्ट्रीय खबर नहीं हो सकती,चाहे संबंधित व्यक्ति कोई हस्ती ही क्यों न हो।

आप निजी समारोहों में डांस से परहेज क्यों करते हैं?

* मैं ऐसा करने में सहज महसूस नहीं करता। वैसे मैं दर्शकों के सामने अनेक शो कर चुका हूं, हालांकि ऐसा किए भी अब छह साल हो चुके हैं। शो करने में मुझे अच्छा लगता है। यह सब मैं अपने दर्शकों के लिए करता हूं। शो में हर व्यक्ति टिकट खरीद कर आता है और मैं उसका मनोरंजन करता हूं।

आपकी नई फिल्म ‘तारे जमीं पर’ के बारे में चर्चा है कि यह आत्मकथा है। क्या इसमें कोई सच्चई है?

* इसकी ‘स्क्रिप्ट’ अमोल गुप्ते ने लिखी है, वे पिछले पांच-सात साल से बच्चों के साथ काम कर रहे हैं। फिल्म की ‘स्क्रिप्ट’ उनके अनुभवों पर आधारित है।

फिल्म के निर्देशन को लेकर विवाद उठ चुका है। क्या अमोल पहले इसका निर्देशन नहीं करने वाले थे?

* हां, पहले वे ही इसका निर्देशन करने वाले थे,लेकिन शूटिंग शुरू होने के एक हफ्ते के भीतर हम दोनों में रचनात्मक मतभेद पैदा हो गए। मैंने प्रोड्यूसर और एक्टर के तौर पर हटने की पेशकश की ताकि वह किसी अन्य के साथ फिल्म बना सके। अमोल ने इस बारे में सोच-विचार करके कहा कि मैं बना रहूं। हालांकि अमोल ने ‘स्क्रिप्ट’ लिखी थी, लेकिन वे क्रिएटिव निर्देशक भी रहे। इसके बाद उन्होंने पूरी शूटिंग में मुझे सहयोग किया।

आपने रचनात्मक मतभेद का जिक्र किया। ऐसी धारणा है कि अभिनेता के तौर पर आपके कई निर्देशकों से मतभेद हो चुके हैं। इस मामले में राम गोपाल वर्मा का नाम लिया जा सकता है। क्या ऐसा इसलिए होता है कि आप उग्र हो जाते हैं ?

* नहीं, यह बिल्कुल सही नहीं है। रामू और मुझमें कोई रचनात्मक मतभेद नहीं हुए। ‘रंगीला’ फिल्म की कामयाबी से मैं खुश था और खुश हूं। मैं निर्देशकों की इच्छा के अनुरूप काम करता हूं। ‘रंगीला’ के बाद रामू ने हालांकि कई बयान दिए, जो सही नहीं थे, लेकिन उन्हें अपने विचार व्यक्त करने का हक है।

आप ‘स्क्रिप्ट’ को ‘सलेक्ट’ करने और रोल के लिए खुद को तैयार करने में काफी वक्त लेते हैं। क्या इसी वजह से आपकी फिल्मों में इतना अंतराल होता है ?

* हां, मैं समय जरूर लेता हूं। मैं औसतन एक साल में एक फिल्म करता हूं। पिछले साल मेरी दो फिल्में- ‘रंग दे बसंती’ और ‘फना’ र्आई। ‘फना’ के डेढ़ साल बाद ‘तारे जमीं पर’ आ रही है।

आपने हत्याकांड की शिकार मॉडल जेसिका लाल की याद में मोमबत्ती भी जलाई। ऐसा क्यों ?

* नहीं, मैंने ऐसा नहीं किया। उस दिन बहुत लोगों ने जेसिका के लिए मोमबत्तियां जलाई थीं, लेकिन उस दिन मैं वहां नहीं था।

लेकिन आपने नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर को समर्थन दिया और नरेंद्र मोदी की आलोचना करते रहे हैं। क्या आपकी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा है या यह सिर्फ आपकी सामाजिक चेतना है ?

* मेरी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है। इस मुद्दे पर मेरे विचार बिल्कुल स्पष्ट हैं। मैं सिर्फ फिल्मों में बने रहना चाहता हूं।

क्या अन्य बड़े सितारों के साथ काम करने में आपको परेशानी होती है?

* नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। हालांकि मैंने अभी तक शाहरुख या रितिक के साथ काम नहीं किया है, लेकिन ऐसा नहीं है कि मैं इससे असहज महसूस करूंगा। बस अभी तक मौका ही नहीं आया है।





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