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तसलीमा की सुरक्षा की नसीहत न दें गृहमंत्री: सिंघवी

जोधपुर. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रदेश के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया को नसीहत नहीं देने की सलाह देते अभिषेक मनु सिंघवीहुए कहा कि बांग्लादेश की लेखिका तसलीमा नसरीन को राजस्थान सरकार ने तो अपने यहां से धकेल दिया था, लेकिन केंद्र सरकार की अनुमति और कांग्रेस सरकार की सुरक्षा की वजह से वे दिल्ली में रह रही हैं।

सिंघवी ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि कटारिया केंद्र सरकार को नसरीन को सुरक्षा प्रदान करने की नसीहत दे रहे हैं जबकि वे जब जयपुर शरण लेने आई थीं तो उन्हें यहां से चले जाने को कह दिया गया था। भारत में वे केंद्र सरकार की अनुमति से रही हैं और राजस्थान भवन में उनको सुरक्षा दिल्ली सरकार प्रदान कर रही है।

गुजरात चुनाव बड़ी चुनौती
सिंघवी ने कहा कि गुजरात में होने वाले चुनाव पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती हैं, इसलिए सारा फोकस अभी वहां लगा रखा है। गुजरात में मोदी सरकार से लोग नाखुश हैं और सत्ता विरोधी माहौल बनने लगा है। कांग्रेस एकजुट होकर मोदी सरकार को सत्ता से हटाने की रणनीति में जुट गई है।

सरकार की उल्टी गिनती शुरू
सिंघवी का मानना है कि राजस्थान में वसुंधरा सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। अगले विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत से कांग्रेस की जीत तय है। उन्होंने कहा कि पिछले चार साल से प्रदेश में पूंजीपति, मुख्यमंत्री के साझेदार व एजेंट शासन चला रहे हैं। सरकार अपने परिवार के लोगों को ट्रस्ट के माध्यस से जमीनें बांट रही हैं और नित नए घोटाले उजागर हो रहे हैं। आपसी खींचतान के चलते पचास प्रतिशत मंत्री मुख्यमंत्री से बात तक नहीं करते।

कांग्रेस नए चेहरे उतारेगी
प्रदेश में कांग्रेस को मजबूत करने की कवायद शुरू हो गई है। इसके साथ ही नए और युवा चेहरों को सामने लाने के लिए हर जिले में तीन सर्वश्रेष्ठ विकल्प तलाशने की तैयारी शरू कर दी गई है। पिछले चुनाव में सत्ता, क्षेत्रीय और व्यक्तिगत विरोधी माहौल की वजह से पराजय का सामना करना पड़ा था। उनका विश्लेषण कर नई रणनीति बनाई जा रही है। नए जोश व एकजुटता से फिर से सत्ता पर काबिज होने के लिए विधानसभा चुनाव की तैयारी की जा रही है।

बसपा से खतरा नहीं, सतर्कता जरूरी
बहुजन समाज पार्टी का हल्ला-हौवा अधिक यथार्थ कम। उससे कांग्रेस को कोई खतरा नहीं,मगर मैं उसे चेतावनी जरूर मानता हूं।

देशहित में सरकार की कुर्बानी मंजूर
परमाणु करार देशहित में हो रहा है और इस करार की वजह से सरकार को जाना पड़े तो भी मंजूर है। यदि सरकार भी जाए और करार भी न हो तो इसका देश को ही नुकसान होगा। इस बारे में वामपंथी दलों से बात चल रही है और उम्मीद है जल्द कोई रास्ता निकलेगा।





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