डूंगरपुर. जनजाति आरक्षण को लेकर रविवार को डूंगरपुर में हुई जनजाति महापंचायत ने स्पष्ट कर दिया कि आरक्षण से छेड़छाड़ की गई तो समूचा प्रांत जल उठेगा।
जनजाति आरक्षण बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति ने महापंचायत का आह्वान किया था।
पंचायत ने जनजाति मंत्रियों और विधायकों को भी चेताया कि यदि उन्होंने समाज का साथ नहीं दिया तो उनको क्षेत्र में घुसने नहीं दिया जाएगा। इसमें चोपड़ा आयोग को भी भंग करने की मांग उठी।
महापंचायत में मुख्य अतिथि विधानसभा में प्रतिपक्ष के उपनेता व नैंनवा से विधायक रामनारायण मीणा थे। उन्होंने कहा कि चोपड़ा कमेटी को भंग किया जाना चाहिए। इस मामले में समाज के तीनों मंत्रियों और 17 विधायकों से जवाब-तलब किया जाएगा, जिन्होंने चोपड़ा कमेटी के गठन को लेकर सहमति जताई थी।
उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि ये नेता आदिवासी अधिकारों की बात करने के बजाय महापंचायत को विफल कराने में जुटे हैं। मीणा ने कहा कि राज्य सरकार जनजाति वर्ग से पक्षपात कर रही है। गुर्जर आंदोलन के दौरान मारे गए गुर्जरों के परिजनों को पांच लाख रुपए की सहायता और सरकारी नौकरी दिए जाने की बात कही गई, लेकिन केसरियाजी में पुलिस गोलीबारी में मारे गए आदिवासी युवक के परिजनों को एक लाख रुपए ही दिए गए। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में आदिवासियों की अस्मिता खतरे में है।
समिति के प्रदेशाध्यक्ष रतनदेवी भराड़ा ने कहा कि आरक्षण में बंटवारे का प्रयास हुआ तो वे हर तरह की कुर्बानी देने को तैयार हैं।
न दिग्गज पहुंचे, न भीड़ जुटी
जनजाति आरक्षण बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति के दावे खोखले साबित हुए। महापंचायत से जनजाति नेताओं ने दूरी बनाए रखी। उधर, 50 हजार लोग जुटने के दावे के विपरीत करीब तीन हजार ही लोग जुट पाए। महापंचायत में केंद्रीय मंत्री नमोनारायण मीणा के आने की बात कही गई थी, लेकिन लेकिन संसद सत्र चालू होने की वजह से वे सभा में नहीं आ सके। केवल नैंनवा विधायक रामनारायण मीणा ही महांपचायत में पहुंचे। मेवाड़-वागड़ के सभी जनजाति विधायक, पूर्व विधायक, जिला प्रमुख, प्रधान सहित अन्य प्रमुख नेताओं ने इस समारोह में शिरकत नहीं की।