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जालंधर. कहीं कोई आपका पीछा तो नहीं कर रहा..किसी की नजर आप पर तो नहीं। प्यार हुआ इकरार हुआ लेकिन नहीं हुआ ऐतबार। डिटैक्टिव डॉन में ओंकार नाथ शास्त्री को कत्ल व चोरी के केस को सॉल्व करते हुए डिटैक्टिव शायद बहुत रहस्यमई लगे। लेकिन सिटी के लोगों के लिए इसमें कुछ भी रहस्यमई नहीं है।
यहां भी डिटैक्टिव डॉन है लेकिन मामला विश्वास के कत्ल व दिल की चोरी का है। सबसे इंट्रस्टिंग है उनका पास आने वाले केस। डायवोर्स, फ्रैंडशिप, प्री-मैरिज इंक्वायरी व बच्चों के चाल-चलन की रिपोर्ट बनवाना आम सा होने लगा है। फीस केस के हिसाब से 2 हजार से लेकर 20 हजार तक भी हो सकती है।
सिटी के सबसे बढ़िया कॉलेज में पढ़ने वाले राहुल को अपनी गर्ल फ्रैंड शिवानी पर हुआ शक तो वे पहुंच गए इंक्वायरी के लिए डिटैक्टिव के पास। कुछ हजार देकर बनवाया गया कैरेक्टर रिपोर्ट कार्ड जिस का रिजल्ट पॉजीटिव निकला। डिटैक्टिव जेएस मिगलानी बताते हैं कि हमारे पास शादी से पहले लड़के व लड़की के कैरेक्टर की इंक्वायरी के केस 60 परसेंट से भी ज्यादा हैं।
इसके बाद बारी डायवोर्स केसिज की आती है। इन केसिज में केस को अपने पक्ष में स्ट्रांग बनाने के लिए लोग कैरेक्टर रिपोर्ट कार्ड भी बनवाते हैं। डिटैक्टिव अरुण शर्मा कहते हैं कि शादी जोड़ने व तोड़ने तक के सफर में हमारा रिपोर्ट कार्ड बहुत मायने रखता है। हम भी सच्चई की तलाश करते हैं और कोशिश होती है कि रिश्ते जुड़े रहें। इसके अलावा हमारे पास सबसे ज्यादा इंट्रस्टिंग व हैरानीजनक केसिज हैं पेरेंट्स द्वारा बच्चों का कैरेक्टर रिपोर्ट कार्ड बनवाना।
कैरेक्टर व ड्रग एडिक्शन संबंधी सवाल पिछले दिनों अंजलि के पेरेंट्स कैरेक्टर चैक के लिए केस लेकर आए। उनका कहना था कि अंजलि कॉलेज में एडमिशन लेने के बाद ज्यादा बनने संवरने लगी है। वे जानना चाहते थे कि कहीं वो बिगड़ तो नहीं गई। डिटैक्टिव सुधीर भारद्वाज बताते हैं कि हम सबसे पहले अपनो पर भरोसा करने क ी सलाह देते हैं। लड़क ो के बारे में उनकी ड्रग एडिक्शन व दोस्तों संबंधी जानकारी मांगी जाती है।
लोग मांगते हैं झूठी रिपोर्ट डायवोर्स लेने जैसे मामलों में लोग झूठी रिपोर्ट बनवाने के लिए भी कहते हैं। लेकिन सरकारी मामला होने के कारण डिटैक्टिव इस चक्कर में नहीं पड़ते।
रीओपन करवाते हैं केस
शादी के बाद जब हसबैंड-वाइफ एक दूसरे के उपर भरोसा नहीं करते तो उन्हें सही जानकारी उपलब्ध करवाई जाती है लेकिन कुछ केसिज में पॉजीटिव रिपोर्ट देने के बाद भी केस रीओपन करवाने के लिए कहा जाता है।
रोजाना आते है 4-5 नए केस
डिटैक्टिव कुलबीर सिंह बताते हैं कि हमारे पास रोजाना 4-5 नए केसिज आते हैं। उनमें ज्यादातर केस तो शादी से पहले जांच पड़ताल के रहते हैं। इसके अलावा कत्ल व चोरी के केस में भी लोग पुलिस के बाद हमारे पास आना पसंद करते हैं।
क्या है क्वालीफिकेशन डिटैक्टिव एजेंसीज के लिए खास क्वालीफिकेशन नहीं हैं। बल्कि काफी टाइम से ऐसी एजेंसीज के साथ काम करना ही काफी माना जाता है। ऐसी एजेंसीज चला रहे ज्यादातर लोग एडवोकेट या फिर पीआर कंपनियों से जुड़े हुए लोग हैं।
प्रूफ व क्रायटीरिया जिसका भी कैरेक्टर रिपोर्ट कार्ड बनाने के लिए कहा जाता है। उसके लिए संबंधित लोगों की फोटोग्राफ्स को ही सही या गलत का आधार मानते हुए प्रूफ इक्ट्ठे किए जाते हैं लेकिन लिमिटेशन्स साथ में रहती है।