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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़.
अगर आप सोते समय खर्राटे लेते हैं, टीवी देखते समय, पेपर पढ़ते समय या ऑफिस में काम करते समय अचानक नींद आ जाती है तो इसे गंभीरता से लेते हुए तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। कहीं आप ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया से पीड़ित न हों।
यह कहना है पीजीआई में चल रही नेशनल एनुअल पल्मोनरी डिजीज कॉन्फ्रेंस में भाग लेने आए कोलकाता के विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ ंमेडिकल साइंसेस के डॉ. धीमान गांगुली का।
बीमारी के कारण जिनकी गर्दन मोटी और छोटी होती है, (इनमें ज्यादातर मोटे लोग होते हैं।) उनका एयर पैसेज (जहां से हवा फेफड़ों में जाती है) बहुत छोटा होता है। जब ये लोग सोते हैं तो एयर पैसेज पूरी तरह बंद हो जाता है। इससे हवा बीच में ही रुक जाती है और अंदर की कार्बन डाई-ऑक्साइड बाहर नहीं जा पाती। यही कारण है कि पेशेंट की नाक से आवाज आने लगती है (जिसे सामान्य भाषा में खर्राटे कहते हैं) और उन्हें काम करते हुए नींद आ जाती है। साइंटिफिक लैंग्वेज में इस बीमारी को ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया कहते हैं। इसके अलावा जो लोग शराब और सिगरेट ज्यादा पीते हैं, वे भी इस बीमारी की हाई रिस्क कैटेगरी में आते हैं।
ज्यादा बढ़ जाए तो जा सकती है जान डॉ. गांगुली कहते हैं, अगर बीमारी ज्यादा बढ़ जाए तो यह सीधे हार्ट पर असर करती है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, हार्ट में अनियमितता आ जाती है और अचानक कार्डियक अटैक पड़ने से पेशेंट की डेथ तक हो सकती है। ज्यादातर इस बीमारी से पीड़ित 45 साल से ज्यादा उम्र के पुरुष होते हैं।
क्या है इलाज डॉ. गांगुली कहते हैं, अभी तक इस बीमारी का उपचार कन्ट्यूनियस पॉजीटिव एयर-वे प्रेशर मशीन से किया जाता है। सोते समय यह मशीन पेशेंट को लगा दी जाती है। इस मशीन की सहायता से हवा प्रेशर से अंदर जाती है और पेशेंट को सांस लेने में मदद मिलती है। इसके अलावा अगर पेशेंट अपना वजन कम कर ले, शराब और सिगरेट पर काबू करे तो इस बीमारी से काफी हद तक छुटकारा पाया जा सकता है।