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जम्मू .नियंत्रण रेखा पर सीज फायर के चार साल पूरे होने से एक दिन पहले पुंछ सैक्टर में पाकिस्तानी रेंजरों ने अंधाधुंध गोलीबारी की। इसमें एक जवान शहीद हुआ है। हालांकि सेना इसे सीज फायर का उल्लंघन नहीं मान रही है। उसका कहना है कि घटना की जांच हो रही है। कृष्णा घाटी (पुंछ सैक्टर) की अग्रिम चौकी लंगूर पोस्ट पर पाक रेंजरों की सोमवार सुबह की गोलीबारी में नायक अजय लामा शहीद हुए हैं।
पूरे होने वाले थे चार साल25 नवंबर 2003 को सीज फायर की घोषणा के बाद 26 नवंबर 2003 से जम्मू-कश्मीर की अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर बंदूकें खामोश हो गई थीं। पहले भी नियंत्रण रेखा पर छिटपुट गोलीबारी होती रही है परन्तु सेना इससे इनकार करती रही है।
क्या कर रही है सरकारखौड़ के विधायक एवं जम्मू-कश्मीर विधानसभा स्पीकर तारा चंद ने दैनिक भास्कर को बताया कि केंद्र सरकार ने 59 करोड़ की आर्थिक सहायता सीमावर्ती विस्थापितों के लिए प्रधानमंत्री रिकंस्ट्रशन पैकेज के तहत राज्य सरकार को दी थी। 6074 परिवारों को 20-20 हजार रुपए घरों की मरम्मत के लिए दिए गए हैं।
खौफजदा हैं किसानअंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर रहने वाले किसान चार साल से खुश थे कि पाकिस्तान और भारत के बीच गरजने वाली बंदूकें शांत हैं, लेकिन पाकिस्तान के मौजूदा हालात से किसान डरे हैं। हिम्मत करके जीरो लाइन के निकट कई किसानों ने धान की खेती की थी। कटाई के दौरान उन्हें लगातार डर लगता रहा कि कहीं सीमा पार से गोली न आ जाए। ये किसान पाक हुक्मरानों पर भरोसा नहीं करते। हालांकि पिछले दिनों दोनों देशों के सचिवों ने सीजफायर जारी रहने के समझौते पर दस्तखत किए गए थे। सीजफायर से किसानों की सामाजिक-आर्थिक हालत बदली है। गरड़ गांव के किसान सतपाल का कहना था कि पहले पाकिस्तान की ओर से सीधा फायर घरों में आता था। ऊंचे बांध बन जाने से अब वह डर नहीं रहा परन्तु गोला आने पर नहीं बचा जा सकता। गांव के लोगों का कहना है कि बच्चे निडर होकर स्कूल जाते हैं, शादियां और त्यौहार धूमधाम से मनाए जा रहे हैं। हम नहीं चाहते कि फिर से हमें टेंटों में रहना पड़े।