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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर. अंचल में खतरनाक बनते जा रहे डकैत गिरोहों के खात्मे के लिए पुलिस ने रणनीति तय कर ली है। जंगल सर्चिग के साथ-साथ डकैत गिरोहों के दुश्मनों से संपर्क किया जा रहा है जो डकैतों के खात्मे में उसकी मदद कर सकें। पिछले तीन-चार दिनों में वरिष्ठ पुलिस अफसर ऐसे ग्रामीणों के पास भी पहुंचे जिनकी डकैत गैंग के किसी सदस्य से अदावत रही है।
उल्लेखनीय है कि गड़रिया गैंग के खात्मे के बाद ग्वालियर रेंज की पुलिस फोर्स ने राहत की सांस ली थी। इस दौरान पुलिस अफसर और पुलिसकर्मी आराम की मुद्रा में आ गए। ऐसे समय का लाभ उन डकैत गिरोहों ने उठाया जो गड़रिया गैंग से दुश्मनी के कारण ग्वालियर-शिवपुरी के जंगलों में आने से बचते थे। गड़रिया के खात्मे के बाद ऐसे गिरोहों ने क्षेत्र में दस्तक दे दी।
राजस्थान से वकीला, जगन और रामविशेष गुर्जर ग्वालियर, शिवपुरी, श्योपुर और मुरैना में जंगल में आ गए। इसके अलावा इटावा के डकैत गिरोह अनूप गुर्जर ने दतिया-बेहट के जंगलों में वारदातें कर अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी। इस गैंग ने पिछले एक साल में इस क्षेत्र से एक दर्जन अपहरण की वारदातों के अलावा हत्या की वारदात को भी अंजाम दिया है।
इधर रामविशेष और जगन गुर्जर ने मुरैना क्षेत्र में वारदातों को अंजाम दिया। वहीं वकीला गिरोह ने शिवपुरी, श्योपुर और ग्वालियर रेंज के जंगलों को अपनी कार्यस्थली बनाया। वकीला गिरोह ने एक पखवाड़े पहले तिघरा थानाक्षेत्र के लखनपुरा में तीन राजस्थानी चरवाहों की हत्या कर सनसनी फैला दी।
वकीला गैंग की इस वारदात के बाद पुलिस अफसरों ने डकैत गिरोहों को खत्म करने की रणनीति एक बार फिर बनाई और उस पर अमल के लिए ऐसे थाना प्रभारियों को नियुक्त किया जिनकी गड़रिया गैंग के खात्मे में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पुलिस ने नई रणनीति के तहत डकैतों के सजातीय लोगों में सेंध लगाने का काम शुरू किया है। पुलिस ने इन डकैतों के ऐसे सजातीय बंधुओं की सूची बनाई है जिनके कभी इन डकैतों से अच्छे संबंध हुआ करते थे और इन दिनों किसी बात को लेकर इनके बीच दुश्मनी है।
पुलिस सूत्र बताते हैं कि डकैतों के ऐसे सजातीय मिले हैं जो उनके बारे में अच्छी जानकारियां रखते हैं और इनसे मुक्ति भी पाना चाहते हैं। जल्द ही इस रणनीति के परिणाम भी देखने को मिलेंगे। इसके अलावा देहात के थाना प्रभारियों को कहा गया है कि सप्ताह में एक दिन ऐसे गांवों में जाएं, जहां डकैत गिरोहों के सजातीय लोग रहते हैं। अफसरों का मानना है कि इन गांवों के ग्रामीणों को भरोसे में लेने से पुलिस के पास सूचनाओं का आना शुरू हो जाएगा।