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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर. राज्य शिक्षा केन्द्र के आयुक्त राधेश्याम जुलानिया ने कहा है कि बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए अध्यापक पढ़ाएं या फिर नौकरी छोड़कर घर जाएं जिससे दूसरे लोग काम करने के लिए आगे आ सकें।
श्री जुलानिया जिला शिक्षा व प्रशिक्षण संस्थान में विभागीय अधिकारियों की बैठक ले रहे थे। उन्होंने कहा कि प्राइमरी स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों के ज्ञान का स्तर बहुत कमजोर पाया गया है। न कक्षा 1-2 के बच्चों को गिनती-पहाड़े आते और न कक्षा 3 व 4 के बच्चों को किताब पढ़ना।
इस स्थिति से प्रदेश को उबारने के लिए डाइट के व्याख्याताओं को अपनी क्षमता के अनरूप मेहनत कर कक्षाओं में अध्यापन का वातावरण तैयार करने की जरूरत है। व्याख्याता अपनी इच्छा से दस-दस, बीस-बीस स्कूलों को गोद लेकर वहां पहुंचे और 31 दिसंबर तक राज्य शिक्षा केन्द्र के निर्देशों के मुताबिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए अभिनव प्रयास करें।
वे पालकों से मिलकर बच्चों को नियमित स्कूल भेजने के लिए उन्हें प्रेरित करें। डीपीसी, डीईओ, बीआरसी, व्याख्याता, बीएसी, सीएसी स्कूल भ्रमण के दौरान देखें कि जो बच्चे जिस कक्षा में पढ़ रहे हैं, क्या उनका शैक्षणिक स्तर उतना है। इसमें जितना सुधार करने की गुंजाइश हो वह किया जाना चाहिए।
श्री जुलानिया ने कहा कि स्कूलों में हर हाल में पढ़ाई का वातावरण कायम होना चाहिए, इसके लिए अध्यापक नियमित रूप से स्कूल आएं और बच्चों को नियमित स्कूल आने के लिए प्रेरित करें तथा शाला में पढ़ाई के लिए वातावरण को रुचिकर बनाया जाए। जो शिक्षक/अध्यापक स्कूल डच्यूटी से गैर हाजिर रहकर अध्यापन कार्य में लापरवाही बरतते हैं, वे नौकरी छोड़कर घर जाएं जिससे अन्य लोग काम के लिए आगे आ सकें।
उन्होंने डीपीसी, डीईओ को ताकीद किया कि वे समन्वय बनाकर काम करें और हर हफ्ते बैठक कर समस्याओं का निराकरण करें जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार हो सके। श्री जुलानिया ने साफ कहा कि आने वाले समय में प्रदेश निरक्षर श्रमिकों की फौज के साथ नहीं बल्कि उच्च तकनीकी शिक्षा वाले कुशल शिल्पियों के साथ विकास के रास्ते पर अग्रसर हो।