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और हो गया प्रत्यारोपण!

लंदन. प्रत्यारोपण के वास्ते दिए गए अंग के ऊतक यदि रोगी के शरीर से न मिलते हों तो शरीर उसे स्वीकार नहीं करता। प्रत्यारोपण की यह सबसे बड़ी धोया, डुबोया और हो गया प्रत्यारोपण!  समस्या है। अब एक क्रांतिकारी उपाय से यह समस्या दूर होने की उम्मीद जगी है।

वर्तमान में प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची के कई रोगियों की उचित दाता के अभाव में मौत हो जाती है। अब नए परीक्षणों से पता चला है कि यदि दाता अंग के आनुवांशिक पदार्थ को ‘धोकर’ निकाल दिया जाए और उसकी जगह रोगी की स्टेम कोशिकाएं प्रत्यारोपित कर दी जाएं तो ऐसा नहीं होगा। स्टेम कोशिकाएं वे कोशिकाएं होती हैं जो विभाजित होकर विभिन्न अंगों के अनुरूप विशेषीकृत कोशिकाएं बनाती हैं। तब रोगी के शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली धोए हुए अंग की कोशिकाओं को अपना समझकर स्वीकार कर लेगी।

नई प्रक्रिया में दान में दिए अंग में लगे रक्त को साफ करने के लिए उसे नमक के पानी से धोया जाता है। इसके बाद इसे विशेष प्रकार के दस गैलन डिटरजेंट में डुबोया जाता है। फिर दान में मिले अंग पर स्टेम कोशिकाएं प्रत्यारोपित की जाती हैं। ये जीवित ऊतकों के रूप में विकसित होती हैं। कुछ दिनों बाद अंग रोगी के शरीर में प्रत्यारोपण के लिए तैयार हो जाता है।

दवाएं लेने से मुक्ति : इससे प्रत्यारोपित अंग वाले रोगियों को जीवनभर एंटी रिजेक्शन दवाएं लेने से भी मुक्ति मिल जाएगी। हालांकि वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि इलाज के इस नए तरीके पर पूरी महारत हासिल करने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना है।





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