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गरीबी व बाल मजदूरी का कारण है अशिक्षा

इंदौर. देश में 6 करोड़ से अधिक बच्चे बाल मजदूरी करते हैं और इतने ही लोग देश में बेरोजगार हैं। सस्ती मजदूरी की वजह से बाल मजदूरी बढ़ रही है, लेकिन उन लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा है जिनके पास कोई काम नहीं होता।

ये कहना है ‘बचपन बचाओं आंदोलन’ और ‘ग्लोबल मार्च अगेन्स्ट चाइल्ड लेबर’ के संस्थापक कैलाश सत्यार्थी का। इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान दिल्ली से आए सत्यार्थी ने भास्कर से बातचीत के दौरान बताया देश में सामाजिक चेतना और राजनीतिक इच्छा की कमी की वजह से बाल मजदूरी बढ़ रही है। गरीबी और बाल मजदूरी का कारण अशिक्षा है।

बाल मजदूरी दुनियाभर की समस्या है लेकिन भारत में बाल मजदूरों की दशा सबसे अधिक खराब है। बचपन बचाओं आंदोलन का उद्देश्य है ऐसे बच्चे जिनका बचपन बाल मजदूरी की वजह से बर्बाद हो रहा है, उन्हें सुरक्षा, सम्मान और शिक्षा मिले। इसके तहत विभिन्न अभियान हम चला रहे हैं।

सन् 2001 में बचपन बचाओं आंदोलन के तहत शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाने के लिए एक देश व्यापी आंदोलन चलाया गया। इसका असर यह हुआ कि तीन महीने के भीतर शिक्षा के अधिकार को संविधान में मौलिक अधिकार बनाया गया।

देश तरक्की कर सकता है :
सत्यार्थी का कहना है देश की विकास वृद्धि दर 9.5 प्रतिशत है। इस पर हम गर्व कर सकते हैं, लेकिन देश की इस तरक्की में सबसे बड़ा योगदान युवा पीढ़ी का है। बच्चे ही इकोनॉमी बूम लेकर आए हैं। आठ दस फीसदी युवाओं से देश इतनी तरक्की कर सकता हैं तो यदि सारे बच्चों को शिक्षा मिलेगी तो कुछ ही साल में देश विकसित राष्ट्र बन जाएगा।





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