जयपुर. जयपुर शहर के ज्यादातर इलाकों का पानी पीने लायक नहीं रहा। बरकत नगर व मालवीय नगर क्षेत्र को छोड़ दिया जाए तो बाकी इलाकों के पानी में ई.
कोलाई बैक्टीरिया की संख्या खतरनाक स्तर तक पर पहुंच गई है। शहर में सप्लाई हो रहे पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बेहद कम है, जबकि कचरा ढाई गुना तक ज्यादा है।
भास्कर टीम के सहयोग से ज्ञान विहार कॉलेज द्वारा शहर के विभिन्न इलाकों के पानी सैंपल की माइक्रोबायोलोजी व रासायनिक जांच में ये तथ्य सामने आए हैं। जांच में पता चला कि शहर के विभिन्न इलाकों में जलदाय विभाग द्वारा सप्लाई किया जा रहा पानी ई. कोलाई, ऑक्सीजन की मात्रा, कठोरता, आयनिक स्थिति, घुलनशील व अघुलनशील कचरे के लिहाज से पीने योग्य नहीं रहा। ज्यादातर इलाकों के पानी की गुणवत्ता तय मानकों से बहुत खराब हो चुकी है।
ऑक्सीजन छह गुना कम, कचरा ढाई गुना ज्यादा : शहर के छह इलाकों से लिए गए पानी की रासायनिक जांच में ऑक्सीजन की मात्रा छह गुना तक कम पाई गई है। मानकों के हिसाब से पानी में 6 पीपीएम ऑक्सीजन होनी चाहिए, जबकि केवल अमृतपुरी इलाके में 1.2 पीपीएम ऑक्सीजन पाई गई है। बाकी जगह तो एक पीपीएम से भी कम ऑक्सीजन है। इसके उलट पानी में घुलनशील व अघुलनशील कचरा 500 से 600 तक होना चाहिए, जबकि सैंपल जांच में यह ढाई गुना तक पाया गया है।
ई. कोलाई से होती हैं बीमारियां
पानी में ई. कोलाई व अन्य कोलाई फॉर्म बैक्टीरिया होने से इन्फैन्टाइल, डायरिया, टायफॉयड, फीवर, यूरिनरी इन्फैक्शन, सेप्सिस, सेप्टिक डायरिया व फाइलोजेनिक इन्फैक्शन जैसी बीमारियां होती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन तथा भारतीय मानक ब्यूरो के मानकों के लिहाज से पानी ई. कोलाई मुक्त होना चाहिए। अन्य कोलाई फॉर्म बैक्टीरिया की संख्या भी प्रति सौ मिलीलीटर 10 से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। भास्कर टीम के साथ ज्ञानविहार यूनिवर्स इंजीनियरिंग कॉलेज की जांच में शहर के कई इलाकों में ई. कोलाई की संख्या 10 से 30 तक प्रति मिलीलीटर पाई गई है। अन्य कोलाई फॉर्म बैक्टीरिया की संख्या में भी 4 से 50 तक प्रति एमएल पाई गई है।
यह है पीने योग्य पानी
* पानी में ऑक्सीजन 6 पीपीएम (पार्ट पर मिलियन) होनी चाहिए
* घुलनशील व अघुलनशील कचरा 500-600 मिग्रा/ लीटर से ज्यादा नहीं होना चाहिए
* कठोरता 100 पीपीएम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए
* चालकता 600 माइक्रो सिमेन से ज्यादा नहीं होनी चाहिए
* फ्लोराइड की मात्रा मिग्रा प्रति लीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए
* नाइट्रेट की मात्रा 45 मिग्रा प्रति लीटर
कठोरता बढ़ने की वजह
शहर का भूजल स्तर लगातार गिरने से पानी में कैल्शियम, मैग्नीशियम, नाइट्रेट, क्लोराइड व सल्फेट की मात्रा बढ़ रही है। यही वजह है कि शहर के ज्यादातर हिस्सों में आ रहे पानी में दाल पूरी तरह नहीं पकती। साबुन में झाग भी नहीं आते।
आयनिकता बढ़ रही है
पीने योग्य पानी में आयनों की स्थिति 600 माइक्रो सिमेन से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। लगातार दूषित हो रहे पानी की वजह से यह लगातार बढ़ रही है। मंडी खटीकान व अमृतपुरी इलाकों में यह मानक से करीब ढाई गुना ज्यादा है। बरकत नगर में पानी साफ होने के बावजूद आयनिक है।
पानी में बैक्टीरिया की स्थिति
एरिया- ई. कोलाई- अन्य कोलाई फॉर्म बैक्टीरिया
(प्रति मिली) (प्रति मिली)
जगतपुरा- 10 20-25
बरकत नगर- 0 10-15
सूरजपोल- 25-30 45-50
मंडी खटीकान- 15-20 25-30
मालवीय नगर- 0 4-6
चांदपोल- 15-20 25-30
पुरानी बस्ती- 17-23 30-40
साफ पानी ई. कोलाई मुक्त होना चाहिए