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कोर्ट तय करेगा-आस्था या अतिक्रमण

जोधपुर. पाली जिले की बर अदालत में एक रोचक मामला आया है। यह विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष हीरासिंह चौहान से जुड़ा है। चौहान ने शपथ-पत्र दिया है, जिसमें उन्होंने अपने पिता स्वर्गीय नाथूसिंह को ‘पित्तर’ हो जाना बताया है और दावा किया है कि उनकी स्मृति में बने स्मारक से राष्ट्रीय राजमार्ग पर दुर्घटनाएं कम हुई हैं। अब अदालत को फैसला करना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के बीच में आ चुके इस स्मारक को सामान्य अतिक्रमण मानकर हटाने की अनुमति दी जाए या धार्मिक मान्यता को स्वीकारते हुए निर्माण को यथावत रखने की इजाजत दी जाए।

क्या है मामला : हीरासिंह चौहान के पिता नाथूसिंह की 13 मई 1973 को झाला चौकी के पास सड़क हादसे में मौत हो गई थी। कहते हैं, हादसे के बाद इस मार्ग पर दुर्घटनाओं की संख्या में एकाएक इजाफा होने और अनेक लोगों की अकाल मौत से लोगों में यह विश्वास घर कर गया कि नाथूसिंह ‘पित्तर’ हो गए हैं। इस पर चौहान के परिजनों ने जनसहयोग से घटनास्थल पर स्मारक बनवाया, ताकि ‘पित्तर’ की आत्मा की शांति के लिए पूजा-अर्चना की जा सके। बताया जाता है कि इसके बाद आश्चर्यजनक ढंग से दुर्घटनाओं में कमी आ गई।

क्यों हुआ विवाद : जब स्मारक बना था, तब सड़क स्टेट मार्ग था। सड़क को राष्ट्रीय राजमार्ग-14 में तब्दील करने के लिए उसे चौड़ा किया गया। स्मारक सड़क के बीच में आ गया। सार्वजनिक निर्माण विभाग अब इसे हटाना चाह रहा है। राज्य विधानसभा में भी स्मारक की वैधता पर प्रश्न उठा था। जब कहीं निर्णय नहीं हुआ तो विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष के भाई ने पाली जिला कलेक्टर सहित पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को प्रतिवादी बनाते हुए बर के सिविल जज कनिष्ठ खंड की अदालत में इस्तगासा दायर कर दिया।

क्या कहा शपथ पत्र में : हीरासिंह चौहान ने शपथ पत्र में कहा है कि हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार अकाल मौत के बाद मृत व्यक्ति की आत्मा भटकती रहती है। मृतक का तर्पण करने और मृत्युस्थल पर स्मारक बनाकर पूजा-अर्चना करने से मृतक की आत्मा को शांति मिलती है। इसी मान्यता के तहत स्मारक बनाया गया। दुर्घटनाओं की संख्या में कमी होने पर लोगों का इसके प्रति विश्वास अधिक पुख्ता हो गया।

* स्मारक बनाने के लिए नियम-कायदे तय हैं। धार्मिक भावनाएं अलग मुद्दा है। लोगों की निजी भावनाओं की खातिर अतिक्रमण की इजाजत नहीं दी जा सकती है। ऐसे तो हर दस कदम पर स्मारक बनने लगेंगे। हम नियमानुसार ही कार्रवाई करेंगे।
- करणसिंह राठौड़, जिला कलेक्टर, पाली

* मेडिकल सांइस के अनुसार मरने के बाद किसी की आत्मा नहीं भटकती है। यह मिथ्या है। आत्मा भटकने के नाम पर अतिक्रमण करना गलत है।
- डॉ.के.एन.व्यास, समाजशास्त्री,जेएनवीयू





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