भोपाल. राजधानी में विभिन्न स्थानों पर पेड पार्किग के रूप में अवैध वसूली की जा रही है। रसीद पर अधिकृत वसूलीकर्ता का नाम भी नदारद है। नगर निगम ने दो
पहिया वाहनों का पार्किग शुल्क एक रुपए तय किया है, लेकिन वाहन मालिकों से दो रुपए शुल्क लिया जा रहा है। उन्हें चार पहिया वाहनों की पार्किग की पर्ची थमाई जा रही है। वसूली पर लगाए गए कर्मचारी भी निर्धारित यूनिफार्म में नहीं रहते।
दैनिक भास्कर संवाददाता ने विभिन्न पार्किग स्थलों का जायजा लिया। उसमें जो स्थिति सामने आई, पेश है उसकी एक रिपोर्ट। एमपी नगर- एमपी नगर जोन वन में होटल सुरेंद्र विलास के सामने दो पहिया वाहन चालाकों से निर्धारित शुल्क से दोगुना लिया जा रहा है। यहां दो रुपए वाली पीली पर्ची वाहन चालकों को दी जा रही है। दरअसल, यह पर्ची चार पहिया वाहनों की पार्किग के लिए है, लेकिन इसे दो पहिया वाहन चालकों को थमाया जा रहा है। यही हाल के अन्य पार्किग स्थलों का है।
न्यू मार्केट- जीटीबी कांप्लेक्स के सामने स्थित पार्किग पर दो पहिया वाहन खड़ा करने का शुल्क दो रुपए। पर्ची पर अधिकृत वसूलीकर्ता का नाम भी नहीं। एक बार में यहां करीब दो सौ वाहन खड़े होते हैं। यह काम करने वाले कर्मचारी निर्धारित गणवेश में भी खड़े नहीं रहते। यहां दो रुपए वाली पीली पर्ची (चार पहिया पार्किग वाली) दी जा रही है। जब यहां के कर्मचारी ने गाड़ी पर ‘प्रेस’ लिखा देखा, तो हाथ से पर्ची लेकर फाड़ दी।
दस नंबर मार्केट- गाड़ी खड़ी करने का शुल्क एक रुपए। यहां नगर निगम द्वारा निर्धारित शुल्क लिया जा रहा है। वाहन मालिकों को एक रुपए लिखी हुई गुलाबी पर्ची दी जा रही है। पर्ची के पीछे सील लगी है। यहां कार्यरत कर्मचारी ने बताया कि दो पहिया वाहनों का शुल्क एक रुपए है, जो छह घंटे के लिए है।
मानसरोवर कांप्लेक्स- मानसरोवर कांप्लेक्स में भी पार्किग शुल्क नगर निगम द्वारा तय किए गए शुल्क से अधिक लिया जा रहा है। यहां भी दो पहिया वाहन चालकों को चार पहिया वाहन की पार्किग वाली दो रुपए की पीली पर्ची दी जा रही है। कर्मचारियों के रूप में कम उम्र के बच्चे यहां वसूली पर लगाए गए हैं।
कार्रवाई नहीं करता निगम
शहर के अधिकतर पेड पार्किग स्थलों पर निर्धारित से अधिक शुल्क की वसूली की जा रही है। इसकी शिकायतें भी नगर निगम पहुंची हैं, लेकिन निगम अमला अपनी आंखें मूंदे बैठा है। सूत्रों के अनुसार पार्किग का ठेका लेने वालों और निगम कर्मचारियों की मिलीभगत से ही यह अवैध वसूली की जा रही है।
वर्दी नहीं पहनते
नगर निगम ने जिन स्थानों पर पार्किग शुल्क वसूली के ठेके दिए हैं, वहां वसूली करने वाले कर्मचारियों के लिए वर्दी पहनना जरूरी है। साथ ही वर्दी में संबंधित कर्मचारी व ठेकेदार का नाम होना भी जरूरी है।
क्या है पार्किग शुल्क
नगर निगम ने पूरे शहर में पार्किग की दर तय कर रखी है। इसके अनुसार दो पहिया वाहनों से प्रति छह घंटे एक रुपए और चार पहिया वाहनों से दो रुपए का शुल्क निर्धारित है। हालांकि निगम परिषद ने 31 जुलाई को यह शुल्क दो व पांच रुपए करने का प्रस्ताव पारित किया है, लेकिन इसे अभी लागू नहीं किया है। जब तक यह प्रस्ताव लागू नहीं होता, तब तक कोई भी दो पहिया वाहनों से एक रुपए और चार पहिया वाहनों से दो रुपए से अधिक शुल्क नहीं वसूल सकता।
ऐसा होने पर लोग नगर निगम की राजस्व शाखा में इसकी शिकायत कर सकते हैं।