भोपाल. शिवराज सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का एलान कर चुकी कांग्रेस अब खुद इससे बचने के रास्ते खोज रही है। इस सत्र में अविश्वास प्रस्ताव पेश होगा या नहीं इसे लेकर अनिश्चितता का आलम है। हालांकि आरोप पत्र का खाका बना लिया गया है, जिसमें सरकार पर लगभग 150 आरोप हैं। इस सत्र में सीएम को पद छोड़ने के लिए मजबूर करना विपक्ष का सबसे पहला मुद्दा होगा। सभी ने सामूहिक रूप से तय किया कि शीतकालीन सत्र में अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा, लेकिन इसे कब पेश किया जाएगा, इसकी तारीख अभी तय नहीं है। बैठक में अविश्वास प्रस्ताव में मुख्यमंत्री और मंत्रियों पर लगाए जाने वाले भ्रष्टाचार के आरोपों को अंतिम रूप दिया गया।
इस मौके पर नेता प्रतिपक्ष जमुनादेवी ने कहा कि भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के मामले में जिस मुख्यमंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है, उसका सीएम पद पर बने रहना घोर अनैतिक और असंवैधानिक है। इससे सदन की गरिमा और मर्यादा को ठेस पहुंच रही है। चर्चा के दौरान सभी विपक्षी सदस्यों ने एक मत से कहा कि आरोपी सीएम से सदन में सवाल-जवाब संसदीय परंपराओं के अनुकूल नहीं है। साथ ही सीएम पद पर रहते हुए उनके मातहत पुलिस अधिकारी निष्पक्ष जांच नहीं कर सकते, इसलिए मुख्यमंत्री का इस्तीफा देना अनिवार्य है।
बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह, सपा के डॉ. सुनीलम और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के मनमोहन शाह बट्टी,जनता दल यू की सरोज बच्चन नायक, एनसीपी के हमीद काजी, बसपा के लाखन सिंह बघेल और निर्दलीय दिलीप गुर्जर ने भी अपने विचार व्यक्त किए। बैठक में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक सुभाष यादव, आरिफ अकील, राज्यवर्धन सिंह, सुनीता बैले और प्रियव्रत सिंह अनुपस्थित रहे। पहले बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एवं अजय सिंह अविश्वास प्रस्ताव पेश करने के पक्ष में नहीं थे।
उनका कहना था कि भ्रष्टाचार का मुद्दा जनता को ज्यादा अपील करेगा। इस मुद्दे पर सदन नहीं चलने देकर सरकार को घेरना ज्यादा बेहतर होगा,इजबकि नेता प्रतिपक्ष जमुनादेवी और सज्जन सिंह वर्मा अविश्वास प्रस्ताव पेश करने के पक्ष में है। उनका कहना है कि अविश्वास प्रस्ताव पेश नहीं करेंगे और सदन नहीं चलने देने की रणनीति अपनाएंगे तो सरकार 28 नवंबर को अनुपूरक बजट पास कराकर सत्र स्थगित करा देगी। इस मुद्दे पर सत्यदेव कटारे पर मौन रहे। अन्य दलों में समाजवादी पार्टी विधायक दल के नेता डॉ. सुनीलम भी अविश्वास प्रस्ताव के बजाय डंपर कांड पर सदन नहीं चलने देने के पक्ष में थे। उन्होंने डंपर कांड को मुद्दा बनाकर पूरे प्रदेश में अभियान चलाने की बात की।
सुबह की बैठक में बसपा और राष्ट्रीय समानता दल के विधायक शामिल नहीं हुए। शाम की बैठक में सभी विपक्षी दलों के सदस्य मौजूद थे। दिनभर की माथापच्ची के बाद अंतत: विपक्ष की यह रणनीति बनी कि डंपर मामले पर सदन नहीं चलने दिया जाएगा। इसकी घोषणा करने पर भी विपक्ष में मतभेद उभरे। माकपा विधायक रामलखन शर्मा ने कहा कि भले ही हम सदन नहीं चलने दें, लेकिन इसकी घोषणा ठीक नहीं है।
क्यों डर रही है कांग्रेस
कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी भले ही कर ली थी, लेकिन सत्ताधारी दल भाजपा की जवाबी तैयारी ने कांग्रेस के पूर्व मंत्रियों को कदम वापस खींचने के लिए मजबूर कर दिया है। भाजपा कांग्रेस के दस साल में हुए भ्रष्टाचार के तमाम मुद्दों को उठाने की तैयारी कर चुकी है। यही वजह है कि अविश्वास प्रस्ताव के बजाय डंपर कांड को लेकर हंगामा कर सदन नहीं चलने देने पर ये मंत्री जोर दे रहे हैं।
आज खिलौना डंपर लेकर आएंगे सदन में
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के विधायक मंगलवार को सदन में खिलौना डंपर लेकर आने की तैयारी कर रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष जमुनादेवी के निवास पर हुई बैठक में शामिल एक विधायक ने बताया कि खिलौना डंपर लेकर आने का निर्णय लिया गया है।