नई दिल्ली. पीएम के फरमान पर व्यापक रायशुमारी और स्पष्टीकरण के बाद इतना साफ हो गया है कि केन्द्र सरकार को राजस्थान को आईआईटी देना ही होगा।
केन्द्र सरकार की ओर से पहली बार स्पष्ट कहा गया है कि प्रधानमंत्री के निर्देश का राजस्थान के आईआईटी पर कोई असर नहीं होगा।
मानवसंसाधन मंत्रालय में संयुक्त सचिव रवि माथुर ने पहली बार चुप्पी तोड़ते हुए भास्कर से साफ शब्दों में कहा है कि प्रधानमंत्री का निर्देश बाद के संस्थानों पर लागू होगा। राजस्थान, बिहार और आंध्रप्रदेश के संबंध में पहले किए गए निर्णयों पर इसका कोई असर नहीं होगा। संयुक्त सचिव के इस स्पष्टीकरण के बाद राजस्थान में आईआईटी को लेकर भ्रम समाप्त हो गया है, लेकिन यह आईआईटी कोटा में होगी या कहीं और, यह तय करना बाकी है।
स्थान चयन में सीधे तौर पर अर्जुन सिंह के हस्तक्षेप के चलते अधिकारी इस मसले पर कुछ भी स्पष्ट तौर पर कहने को तैयार नहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक स्थान चयन के लिए बनी उच्च स्तरीय समिति ने कोटा के पक्ष में सकारात्मक राय चाहिर की थी, लेकिन राजनीतिक कारणों से मानवसंसाधन मंत्री ने इसे अभी तक हरी झण्डी नहीं दी है। अब अधिकारी कह रहे हैं कि इस संबंध में अभी अंतिम राय नहीं बन पाई है और कमेटी जल्द ही इस मसले पर दुबारा चर्चा कर सकती है।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान, बिहार और आंध्रप्रदेश में आईआईटी की स्थापना का फैसला गत वर्ष ही कर लिया गया था। योजना आयोग ने केन्द्र के प्रस्ताव को हरी झण्डी भी दे दी थी। आंध्र सरकार और बिहार की तत्परता के साथ केन्द्र का भी उन्हें साथ मिला। इन दोनों जगहों पर आईआईटी स्थापना की राह साफ हो गई है, लेकिन राजस्थान सरकार की शुरूआती सुस्ती और अंदरूनी विरोध के बाद अब केन्द्र ने भी इस पर पेंच फंसा रखी है।