बांसवाड़ा. वन विभाग के अधीन कार्यरत वनपालों की अस्थायी वरिष्ठता सूची में व्यापक गड़बड़ियां सामने आई हैं। सूची में दो वनपालों की उम्र महज 4 और 7 वर्ष बताई गई है। साथ ही सेवानिवृत्त, दिवंगत और पदोन्नत हो चुके वनपालों के नाम भी सूची में शामिल हैं।
वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय की ओर से गत 17 नवंबर को राज्य के 922 वनपालों की अस्थायी वरिष्ठता सूची जारी की गई थी। सूची में क्रमांक एक पर वनपाल नारायण मीणा पुत्र श्यामचंद की जन्मतिथि 10 जुलाई, 1953 अंकित है, लेकिन उनकी नियुक्ति तिथि 7 जून, 1960 बताई गई है। क्रमांक दो पर अंकित गजेंद्रपालसिंह पुत्र भोपालसिंह की जन्मतिथि 30 सितंबर, 1956 है। वरिष्ठता सूची में नियुक्ति तिथि 11 नवंबर, 1960 बताई गई है।
सूची में गड़बड़ी का आलम यह है कि विभाग में बतौर रेंजर कार्यरत कर्मियों के नाम भी वनपाल के रूप में दर्ज किया गया है। सूची में 38वें नंबर पर बृजपालसिंह पुत्र भंवरसिंह को वनपाल बताया गया है, जबकि वे 3 जुलाई, 1983 से रेंजर हैं। यही स्थिति 129 नंबर पर केसरीसिंह की है। वे भी बतौर रेंजर प्रतापगढ़ में कार्यरत हैंै।
* वनपालों की अस्थायी सूची में दिवंगत, सेवानिवृत्त और पदोन्नति पाने वाले कर्मचारियों के नाम भी शामिल हैं। प्रधान मुख्य संरक्षक कार्यालय को पत्र भेजकर इसका विरोध जताया जाएगा।
—सज्जनसिंह राठौड़, जिलाध्यक्ष वन अधीनस्थ कर्मचारी संघ, बांसवाड़ा
* विभाग में कार्यरत वनपालों की वरिष्ठता सूची तैयार करने में हुई अनदेखी और लापरवाही से अवगत कराने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। संगठन अब दिसंबर में जागरण अभियान चलाया जाएगा।
—जसवंतसिंह तंवर, प्रदेशाध्यक्ष, राजस्थान वन अधीनस्थ कर्मचारी संघ
सेवानिवृत्त और दिवंगतों के नाम भी
सूची में विभाग से सेवानिवृत्त, पदोन्नत होकर रेंजर बनने वाले और दिवंगत वनपालों के नाम भी शामिल हैं। सूची में 67वें नंबर पर दर्ज वनपाल विजयसिंह पुत्र धूलजी गत 31 मार्च को ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन उन्हें विभाग में कार्यरत बताया गया है। इसी प्रकार वर्ष 2002 में दिवंगत वनपाल नारायणलाल का नाम भी सूची में 291वें नंबर पर है। सूची में 87 नंबर पर नरेंद्रसिंह का नाम व विशेष विवरण में स्वर्गवास अंकित है, जबकि दिवंगत होने के बाद उनके पुत्र को डूंगरपुर में नियुक्ति दी जा चुकी है।
नाम जो शामिल ही नहीं हुए वनपालों की वरिष्ठता सूची में कुछ वनपालों के नाम शामिल ही नहीं किए। इनमें बांसवाड़ा के नरपतसिंह रेंज डूंगरा, सेवुलाल रेंज कुशलगढ़, सचिन शर्मा व दिलीपसिंह चौहान प्रमुख हैं।