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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. शहीद सैनिकों के माता-पिता भी अब फैमिली पेंशन के हकदार होंगे। अभी तक इसकी हकदार केवल शहीद की विधवा ही थी। इस बारे में केंद्र ने पेंशन रेग्युलेशंस फॉर आर्मी 1961 के प्रावधानों में संशोधन कर दिया है।
यह जानकारी सोमवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया निर्मलजीत कौर ने इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर दी। उन्होंने इस बारे में केंद्र के नोटिफिकेशन की कॉपी देने के लिए कोर्ट से कुछ समय मांगा। इस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई 18 मार्च के लिए स्थगित कर दी।
यह था मामला : कुछ समय पूर्व पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर पेंशन रेग्युलेशंस फॉर आर्मी 1961 के रेग्युलेशन 6 में संशोधन की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता एडवोकेट एच.सी. अरोड़ा की दलील थी सैनिक के शहीद होने के बाद पेंशन तो उसकी विधवा ले लेती है।
कई मामलों में वह दूसरी शादी भी कर लेती है जबकि अपने बेटे पर निर्भर उसके माता-पिता पूरी जिंदगी तंगी में गुजारनी पड़ती है। याचिकाकर्ता का कहना था कि शहीद के माता-पिता को भी अपने बेटे की शहादत दिवस और अन्य राजकीय समारोहों में सम्मान मिलना चाहिए। याचिका में 5 शहीदों कैप्टन सुमित कोहली (शौर्य चक्र) के अलावा बहादुरी पुरस्कारों से सम्मानित मेजर संदीप सागर, कैप्टन रोहित कौशल, लांस नायक किरपाल सिंह और अशोक चक्र विजेता शहीद मेजर संदीप शुक्ला का भी जिक्र था।
इनके माता-पिता को किसी प्रकार की फैमिली पेंशन नहीं मिलती है, इनमें से तीन शहीदों की विधवाओं ने दोबारा शादी करवा ली थी। बावजूद उसके उन्हें कोई बेनेफिट नहीं मिला। याची ने कोर्ट से शहीद के माता-पिता को भी फैमिली पेंशन की परिभाषा में शामिल करने के आदेश देने की मांग की थी।