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Raipur Raipur रायपुर. शासन से 10 करोड़ रुपए मिलने के बाद छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेस(सिम्स) का नियंत्रण चिकित्सा शिक्षा विभाग के पास आ जाएगा। सूत्रों का कहना है कि दिसंबर के पहले सप्ताह से सिम्स को टेक ओवर करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
सिम्स का संचालन और नियंत्रण अपने हाथ में लेने से पहले चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारी किसी तरह की कोई कमी बाकी नहीं रखना चाहते। अफसरों का कहना है कि अस्पताल का संचालन करने के लिए दवा और उपकरणों के साथ-साथ डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ का वेतन देना होगा।
सिम्स के खजाने में पर्याप्त बजट होने पर अफसरों को हर महीने सरकार का मुंह ताकना नहीं पड़ेगा। यही वजह है कि दवा और स्टाफ के वेतन के खर्च का आंकलन करने के बाद 10 करोड़ मांगे गए हैं। यह रकम मार्च तक के लिए मांगी गई है। अफसरों का मानना है कि चार महीने अस्पताल और कालेज का संचालन करने के बाद सालाना खर्च का प्रैक्टिकल अनुभव हो जाएगा। उसके बाद रेग्यूलर बजट मांगा जाएगा।
बताते हैं कि डीएमई में सिम्स के संचालन का खाका भी तैयार कर लिया गया है। टक ओवर करने के बाद पहले ही दिन से सिम्स का प्रशासनिक और टीचिंग स्टाफ को किस तरह हैंडल किया जाएगा, इस बारे में प्लानिंग कर ली गई है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने सिम्स के मौजूदा स्टाफ का आंकड़ा कलेक्ट कर लिया है।
सिम्स में गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के अटैच कर्मियों की फेहरिस्त अलग बनाई गई है। सिम्स का संचालन हाथ में लेने के साथ ही नए डीन की नियुक्ति की जाएगी। बताते हैं रायपुर मेडिकल कालेज के सीनियर प्रोफेसर को यह जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी है। डीन के रुप में ईएनटी विभाग के एचओडी डा. एनके गोयल और सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. एके शर्मा के अलावा सिम्स के मौजूदा स्टाफ में से भी किसी सीनियर प्रोफेसर को प्रभारी डीन बनाया जा सकता है।
गौरतलब है कि सिम्स का संचालन अभी गुरु घासीदास विवि कर रहा है। सिम्स का सरकारीकरण होने के बाद न सिर्फ मरीजों को बेहतर और सुलभ इलाज मिल सकेगा बल्कि कालेज में पेमेंट सीट का फंडा भी खत्म हो जाएगा। विद्यार्थियों को 14-15 हजार रुपए सालाना फीस देनी होगी। अभी सिम्स में 50 सीटें पेमेंट और 50 फ्री सीटें हैं। पेमेंट सीट में प्रवेश के लिए दो लाख रुपए सालाना फीस देनी पड़ती है।