Breaking News 
bhaskar Web English


HomeVichaar Vichaar

भारत को एक नहीं तीन क्रिकेट टीमों की जरूरत

आलेख. भारत जब से ट्वेंटी-20 का चैंपियन बना है, तब से यह सुनते-सुनते कान पक गए कि अब वक्त आ गया है कि सचिन, द्रविड़, सौरव और कुंबले जैसे भारत को एक नहीं तीन क्रिकेट टीमों की जरूरतपुराने खिलाड़ियों को टीम से बाहर कर दिया जाए, ताकि युवा प्रतिभाओं को ज्यादा से ज्यादा मौका मिल सके। टेस्ट, वनडे और ट्वेंटी-20, तीनों तरह की क्रिकेट की कप्तानी धोनी को सौंप देनी चाहिए। ऐसा कहने वालों का मानना यह है कि पुराने खिलाड़ियों को अपना रिकार्ड बेहतर करने और विज्ञापन अनुबंधों से धन कमाने के लिए और ज्यादा नहीं ढोया जाना चाहिए।

मेरे ख्याल से ऐसी बातें तीन कारणों से उठ रही हैं। पहला, कुर्सियों में जमे पुराने नेताओं और नौकरशाहों के प्रति हमारी स्वाभाविक अरुचि। हाल ही का मामला लीजिए, यह देखकर कितना घृणास्पद लगता है कि देवेगौड़ा जैसा राजनेता जो देश का प्रधानमंत्री रहा हो, उसने खुद को कर्नाटक की निम्नस्तरीय राजनीति में किस तरह खपा रखा है। इस तरह के नेताओं को वाकई हम भुला देना चाहेंगे। देवेगौड़ा की तरह राजनीति में बहुत से ऐसे लोग हैं जो कुर्सियों पर जमें हैं, जबकि जनता उन्हें वहां नहीं देखना चाहती। ऐसे लोग ही समाज का वातावरण खराब करते हैं तथा विभिन्न क्षेत्रों में हमारे निर्णयों को प्रभावित करते हैं। पुराने और लगातार पदों पर जमे हुए लोगों के प्रति हमारी स्वाभाविक अरुचि के चलते ही हम खिलाड़ियों के संदर्भ में भी ऐसी ही बात करने लगते हैं। लेकिन जब हम पुराने खिलाड़ियों की बात करते हैं तो यह भूल जाते हैं कि इनकी उम्र तो अभी तीस-पैंतीस से ज्यादा नहीं है।

दूसरा, मेरे जैसे बहुत से ऐसे लोग यह सुनते-सुनते थक गए होंगे कि देखो कौन, किस तरह, कितना धन कमा रहा है। मैं आमिर खान का अभिनय, सानिया मिर्जा का खेल, अतुल डोडिया की पेंटिंग्स देखना चाहता हूं, मेरी इसमें भी दिलचस्पी हो सकती है कि रतन टाटा ने अपने ब्रांड को किस ऊंचाई तक पहुंचा दिया। मेरा इससे क्या लेना-देना कि कौन कितना धन कमा रहा है। लेकिन यहां ऐसे लोगों की भी कमी नहीं जो यह जानना चाहते हैं कि रोनित रॉय सीरियल के एक एपीसोड के लिए कितना लेते हैं, पर मेरा वास्ता तो उनके सीरियल को देखने भर से है। उसी तरह इस बात में भी मेरी कोई दिलचस्पी नहीं है कि सचिन, द्रविड़, सौरव और कुंबले विज्ञापनों से कितना कमाते हैं। मेरे आकर्षण का विषय तो सिर्फ इनका खेल है।

पुराने खिलाड़ियों को टीम से बाहर कर देने की बात करने वालों के पास तीसरा कारण यह है कि वे ऐसा मानते हैं कि ये खिलाड़ी बोर्ड के पदाधिकारियों के साथ मिलकर राजनीति करते हैं जिसकी वजह से प्रतिभावान खिलाड़ियों को उभरने का मौका नहीं मिलता। यह तो सही है कि दुनिया में कोई ऐसा देश नहीं है, जहां खेल गतिविधियों का नियंत्रण नेता और उनके चमचे करते हों, पर भारत में इनके हुक्म के बगैर पत्ता तक नहीं खड़कता। लेकिन यह सही नहीं है कि वरिष्ठ खिलाड़ी उनके साथ मिलकर राजनीति करते है। सही यो यह है कि खेल की राजनीति के सबसे ज्यादा शिकार यही खिलाड़ी ही बनते हैं।

बहरहाल, टेस्ट कप्तान के रूप में कुंबले ने बेहतरीन शुरुआत की है और एक तरह से वरिष्ठ खिलाड़ियों को टीम से हटाने की बात करने वालों को करारा जवाब भी दिया है। कोटला टेस्ट में लोगों ने देखा कि कुंबले एक कप्तान के रूप में कितना दमखम रखते हैं। और यह भी स्पष्ट हो गया कि सचिन, द्रविड़ और सौरव के भीतर अभी बहुत क्रिकेट बाकी है। जो इन्हें निवृत्त करने की बात करते हैं वे निहायत मूर्ख हैं और उन्हें क्रिकेट की जरा भी समझ नहीं है। यह भी दुराग्रहपूर्ण तर्क है कि वरिष्ठों को बाहर करने के बाद ही युवाओं को मौका मिल पाएगा। क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है। बड़े से बड़े खिलाड़ी को अच्छा प्रदर्शन करने के लिए तनाव से गुजरना पड़ता है। खेल प्रेमियों की आकांक्षाएं अनंत होती हैं, इन्हें कोई भी तृप्त नहीं कर सकता।

वरिष्ठ खिलाड़ियों को लेकर उठने वाली ऐसी बातों का समाधान भी क्रिकेट के भीतर ही है। आज हमारे पास वैसे भी क्रिकेट के तीन लोकप्रिय रूप मौजूद हैं, टेस्ट, वनडे और ट्वेंटी-20। अब जो खिलाड़ी क्रिकेट के जिस रूप में बेहतर फिट बैठे उसे उस टीम में रख लीजिए। कोई जरूरी नहीं कि तीनों तरह की क्रिकेट खेलने वाली टीम एक ही हो। इसी तरह एक ही कप्तान की भी जरूरत नहीं। धोनी ट्वेंटी-20 के बादशाह हैं तो वे इसकी कप्तानी करें। कुंबले को टेस्ट का अनुभव है तो वे टेस्ट मैंचों की कमान संभालें। युवराज वनडे में कमाल करते हैं तो उन्हें इसका नेतृत्व दिया जाए। उसी तरह सचिन सौरव, द्रविड़ और कुंबले का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल टेस्ट क्रिकेट में किया जो। जो हिटर और फास्टर हैं उन्हें ट्वेंटी-20 में रखा जाए। और हरफनमौलाओं के लिए तो वनडे है ही। इस तरह जब हमारे पास तीन अलग-अलग टीमें होंगी तो ज्यादा से ज्यादा प्रतिभाओं को मौका मिलेगा।

-लेखक वरिष्ठ पत्रकार व फिल्मकार हैं।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड:
 

आपके विचार
imran
Wednesday, 28th Nov 2007, 9:07
main aapki baat se poori tarah sahmat hoon jaisi chah waisi raah jahan tak test match ka sawal hai mujhe nahi lagta ki dravid,kumble,sachin ganguly aur laxman se better koi ho sakta hai yeh 5 khialdi team india ke aadhar stambh hai jinko bhedna kisi bhi team ke liye musqil hai.. ek pathak