|
News
Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. विधानसभा में आज संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ राजभाषा (संशोधन) विधेयक पेश किया। तालियों के बीच इस विधेयक के पेश होते ही विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पांडे ने नियमों को शिथिल करते हुए सदन की कार्यवाही छत्तीसगढ़ी में संचालित करने की अनुमति भी दे दी। सभी सदस्यों ने छत्तीसगढ़ी में ही अपनी बातें रखीं।
इस विधेयक का कांग्रेस विधायक रविंद्र चौबे और भूपेश बघेल ने यह कहकर विरोध किया कि सरकार इसे हिंदी के अतिरिक्त राजभाषा के रूप में दर्जा देना चाह रही है। उन्होंने छत्तीसगढ़ी को पूर्णरूपेण राजभाषा का दर्जा देने की मांग की। अन्य कांग्रेस विधायकों ने इसी बात पर सरकार को घेरने का प्रयास किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए सरकार हड़बड़ी में राजभाषा विधेयक पेश कर रही है। श्री अग्रवाल ने कहा कि जब तक छत्तीसगढ़ी की लिपि पूरी तरह तैयार नहीं हो जाती और इसका अभ्यास नहीं हो जाता तब तक पूर्ण रूप से छत्तीसगढ़ी को लागू नहीं किया जा सकता। हिंदी के साथ छत्तीसगढ़ी राजभाषा के रूप में काम करेगी।
उसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने इस पर ध्वनिमत मांगा तो सत्ता पक्ष ने तालियां के साथ हामी भरी, लेकिन विपक्ष के लोग चुप बैठे रहे। उन्होंने इसका न विरोध किया और न ही समर्थन में हां कहा।
विधेयक पेश होने के बाद अध्यक्ष श्री पांडे ने कहा कि विधानसभा के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। राज्य की बोलचाल की भाषा अब राजभाषा का स्वरूप लेने जा रही है। उन्होंने छत्तीसगढ़ी में कार्यवाही का संचालन करने के लिए व्यवस्था दी। विधेयक पारित होने की प्रत्याशा में नियम 235 को शिथिल करते हुए सभा की कार्यवाही में चर्चा के लिए छत्तीसगढ़ी भाषा का उपयोग करने का प्रावधान किया गया है।
विधानसभा में छत्तीसगढ़ी का हिंदी में अनुवाद करने और इसे ईयरफोन में सुनने की भी व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह, संस्कृति मंत्री श्री अग्रवाल, कांग्रेस विधायक दल के उपनेता श्री बघेल, रविंद्र चौबे, नोबेल वर्मा और कामदा जोल्हे ने छत्तीसगढ़ी में सदन की कार्यवाही संचालित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष की पहल का स्वागत किया।
एक नजर में :
- नाम होगा छत्तीसगढ़ी राजभाषा (संशोधन) विधेयक 2007।
- राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त की जाने वाली भाषा में हिंदी के साथ छत्तीसगढ़ी का भी प्रयोग हो सकेगा।
- छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित होने के दिन से यह प्रभावशील होगी।
- छत्तीसगढ़ी राजभाषा अधिनियम 1957 में संशोधन किया जाएगा।