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बेयरर चेक मामले में दो और सीईओ फंसे

बिलासपुर. पंचायतीराज अधिनियमों के विपरीत सरपंचों को बेयरर चेक जारी करने के मामले में मस्तूरी जनपद पंचायत के सीईओ आरएस नायक अकेले दोषी नहीं है, बल्कि पथरिया के तत्कालीन सीईओ जेआर भगत एवं बिल्हा के सीईओ आरएस मेहरा की लिप्तता की जानकारी मिली है। इस मामले में दोनों सीईओ के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की तलवार लटकने लगी है।

खबर है कि बिल्हा के तत्कालीन सीईओ आरएस मेहरा वर्तमान में आरंग में पदस्थ है। इस दौरान शिक्षाकर्मियों की भर्ती में अनियमितता के मामले में उन्हें निलंबित कर दिया गया है। ऐसी स्थिति में यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि श्री मेहरा के खिलाफ अब क्या कार्रवाई की जाएगी? बेयरर चेक जारी करने का मामला वर्ष 2004-5 का है।

इधर श्री नायक को निलंबित करने संबंधी आदेश पंचायत सचिव आरपी मंडल द्वारा जारी आदेश पर आज प्रक्रिया शुरू कर दी गई। श्री मंडल के हस्ताक्षर से 23 नवंबर को जारी निलंबन आदेश अवकाश की वजह से सोमवार को देर शाम प्राप्त हुआ। आदेश में लिखा है कि श्री नायर जब से मस्तूरी में पदस्थ हुए नियम विरुद्ध बेयरर चेक जारी करने का मामला लगातार हुआ।

यह छत्तीसगढ़ कोषालय संहिता के भाग-1 सहायक नियम 141,156 का उल्लंघन है। लिहाजा श्री नायक के खिलाफ छत्तीसगढ़ सिविल सेवा(वर्गीकरण नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 14 के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्रवाई करते लिखा गया है कि उन्हें जनहित में पद में बनाए रखना उचित नहीं होगा।

गौरतलब है कि एनसीपी विधायक नोबेल वर्मा ने बेयरर चेक मामले में विधानसभा में ध्यानाकर्षण सूचना क्रमांक 97 लगाई है। समझा जाता है कि सरकार ने किरकिरी से बचने के लिए विधानसभा में ध्यानाकर्षण सूचना लगने के पहले ही जवाब की दृष्टि से कार्रवाई कर दी। जांच रिपोर्ट के मुताबिक मस्तूरी के तत्कालीन सीईओ श्री नायक पर 68 लाख के बेयरर चेक जारी करने का तथ्य उभरकर सामने आया है।





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