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वकीलों ने नहीं की वकालत

बिलासपुर. उत्तरप्रदेश की तीन अदालतों में सीरियल बम विस्फोट के बाद वकीलों ने कोर्ट की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए मंगलवार को न्यायालयीन कामकाज बंद रखा। हाईकोर्ट व जिला कोर्ट बार एसोसिएशन ने जुलूस निकालकर महाधिवक्ता व कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

उत्तरप्रदेश के लखनऊ, बनारस व फैजाबाद के कोर्ट में 23 नवंबर को हुई आतंकवादी घटनाओं में बड़ी संख्या में लोग मारे गए थे। कोर्ट परिसर में बम विस्फोट को गंभीरता से लेते हुए यहां के वकीलों ने अदालतों में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था करने की मांग करते हुए काम बंद रखा। कोर्ट पहुंचे वकील दूसरे दिन भी लालपट्टी लगाए हुए थे।

हाईकोर्ट बार के सभी सदस्य सुबह 11 बजे गांधी चौक पर जुटे, जहां से हाईकोर्ट तक मौन जुलूस निकाला गया। कोर्ट में महाधिवक्ता को प्रधानमंत्री, के नाम ज्ञापन सौंपा। बार के सेकेट्ररी किशोर भादुड़ी ने बताया कि ज्ञापन में घटना की तीखी निंदा करते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग की गई है।

इधर जिला एवं सत्र न्यायालय के वकीलों ने नेहरू चौक से कलेक्टोरेट तक जुलूस निकाला। यहां पहुंचकर उन्होंने कलेक्टर को मुख्यमंत्री, गृहमंत्री व विधि-विधायी मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। जिला अधिवक्ता संघ ने ज्ञापन में कहा है कि कार्यपालिका, व्यवस्थापिका और न्यायपालिका महत्वपूर्ण अंग हैं। न्यायपालिका ऐसे आतंकी हमलों से बची हुई थी, लेकिन यूपी की घटनाओं से अदालतों की सुरक्षा की पोल खुल गई है।

शासन से मांग की गई कि इस घटना से सीख लेते हुए सभी अदालतों में पुलिस चौकी बनाए जाएं। समय-समय पर छापामार कार्रवाई कर मेटल डिटेक्टर से तलाशी ली जाए। संघ ने मृतक अधिवक्ताओं के परिजनों को 10-10 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की।





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