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नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने नगर निगम इंदौर की ठोस कूड़ा प्रबंधन योजना (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट स्कीम) को सुधार के लिए वापस भेज दिया। केंद्र ने कहा है कि इंदौर की इस योजना में सार्वजनिक निजी भागीदारी की संभावना तलाशी जाए। साथ ही निगम कूड़ा फैलाने वालों पर जुर्माने का प्रावधान करे।
निगम ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की जवाहरलाल नेहरू शहरी नवीनीकरण योजना (जेएनएनयूआरएम) के तहत इस योजना में केंद्र सरकार से आर्थिक मदद का अनुरोध किया था। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने योजना को नए सिरे से तैयार करने के लिए कहा है।
इस समय इंदौर में 743 मीट्रिक टन कूड़ा प्रतिदिन निकलता है, जिसमें से 450 मीट्रिक टन कूड़ा ही एकत्रित और नष्ट हो पाता है। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक इंदौर में कूड़ा भंडार के लिए द्वितीय स्तरीय 1120 स्थान छांटे गए हैं।
स्थानीय प्रशासन चाहता है कि कूड़े का वर्गीकरण करने की ठोस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के अलावा निगम द्वितीय स्तरीय कूड़ा संग्रहण जगहों की संख्या बढ़ाए। जिससे आवासीय, स्लम, संस्थागत और सड़कों से पूरा कूड़ा एकत्रित किया जा सके। स्थानीय प्रशासन ने 20 टीपीडी प्लास्टिक इनगोट प्लांट लगाने की भी इच्छा जताई है।
देवगुराड़िया में चार सौ टीपीडी क्षमता वाला कंपोस्ट प्लांट लगाने के प्रस्ताव के साथ यहीं पर बेकार कूड़े को ठिकाने लगाने के लिए लैंडफिल साइट बनाने की भी इच्छा जताई गई है।