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वकालत का लाइसेंस 40 साल तक देने का प्रस्ताव

चंडीगढ़ बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) वकालत का लाइसेंस केवल 40 साल की उम्र तक के कानून की डिग्रीधारकों को ही देने का विचार कर रही है। इस संबंध में बाकायदा बीसीआई ने एक रेज्योलुशन भी पास कर दिया है। हालांकि इस प्रस्ताव पर अभी केंद्र सरकार की मोहर लगनी बाकी है।

18 को पास किया रेज्योलुशन रेज्योलुशन 18 नवंबर को दिल्ली में बीसीआई की ज्वाइंट कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस में पास किया गया। बीसीआई के चेयरमैन की अध्यक्षता में आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में सभी राज्यों के प्रतिनिधि मौजूद थे।

संशोधन का प्रस्ताव पास : कॉन्फ्रेंस में एडवोकेट्स एक्ट 1961 के तहत बनाए गए बार काउंसिल के उन नियमों में संशोधन के लिए केंद्र से अनुमति का प्रस्ताव पास किया गया, जिनमें वकीलों का वकालत का लाइसेंस देने के लिए कोई उम्र निर्धारित नहीं है। बीसीआई अब चाहती है कि केवल 40 साल की उम्र तक के लोगों को ही वकालत का लाइसेंस दिया जाए।

इस संबंध में बीसीआई की दलील है कि लाइसेंस की उम्र निर्धारित करने से पेशे की प्रति गंभीर लोग ही प्रोफेशन में आएंगे। हालांकि कुछ समय पूर्व कुछ स्टेट बार काउंसिलों ने प्रस्ताव पास कर वकालत के लाइसेंस की आयु सीमा 45 साल कर दी थी।

, लेकिन स्टेट बार काउंसिलों के इन फैसलों को संबंधित राज्यों की हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था। इसी वजह से अब बीसीआई ने खुद वकालत के लाइसेंस की आयुसीमा निर्धारित करने के लिए बाकायदा बार काउंसिल नियमों में ही केंद्र से संशोधन की मांग को लेकर प्रस्ताव पास कर दिया है।





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